डिफॉल्‍टर्स के नाम सार्वजनिक करे मोदी सरकार: मुख्‍य सूचना आयुक्‍त

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श्रीधर आचार्युलु ने अपने आदेश में, आयुक्त ने पीएमओ को फटकार भी लगाई है। दरअसल, पीएमओ ने अपने 2 नवंबर को अपनी प्रतिक्रिया में रघुराम राजन के उस पत्र के बारे में किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया था, जिसमें यह पूछा गया था कि
देश के बड़े डिफाल्टरों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की गई है। यह पत्र रिजर्व बैंक के गर्वनर रह चुके रघुराम राजन ने वर्ष 2015 में लिखा था। पीएमओ ने दावा किया था कि ऑरिजनल याचिका में इस बात का जिक्र नहीं था, इसलिए वह इसका पालन करने के लिए उत्तरदायी नहीं था।
केंद्रीय सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने प्रधानमंत्री कार्यालय से नाराजगी जताई हैं। उन्होंने शुक्रवार (16 नवंबर) को कहा कि केंद्र सरकार बड़े लोन डिफाल्टर के नाम का खुलासा करें। उनके नाम को सार्वजनिक किया जाए। साथ ही उन्होंने पीएमओ द्वारा हाल ही में इस जिम्मेदारी खारिज करने की प्रतिक्रिया को भी गलत बताया।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, आचार्युलु ने कहा, “यदि किसी भी अपवाद के आधार पर कोई आपत्ति है तो पीएमअो को ऐसे प्रावधान की मांग करनी चाहिए और अपने इनकार को न्यायोचित ठहराना चाहिए। इसके बदले, पीएमओ ने रघुराम राजन के पत्र पर कार्रवाई की बात का खुलासा करने से इंकार कर दिया।
यह इनकार उस आधार पर किया गया है, जो कानूनी नहीं है।” उन्होंने आगे कहा, “भारतीय रिजर्व बैंक के सीपीआईओ ने जानकारी नहीं दी क्योंकि
उच्च प्राधिकारी द्वारा अनुमति नहीं दी गई थी। इस उच्च प्राधिकारी में शीर्ष नीति निर्माता भी शामिल हो सकते हैं।” लेकिन सीआईसी ने आरबीआई द्वारा प्रतिक्रिया के लिए अधिक समय के आग्रह को स्वीकार किया।
आचार्युलु ने आरबीआई के गवर्नर उर्जित पटेल को सर्वोच्च न्यायालय के पिछले आदेशों को अनदेखा करने के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होने के अपने फैसले का भी बचाव किया। उन्होंने कहा, “क्या एक साधारण पीआईओ इतना बड़ा काम कर सकता है?
आरबीआई का कोई बड़ा अधिकारी यह काम करेगा। तो क्या आपको लगता है कि मुझ जैसे साधारण कर्मचारी को दंडित किया जाना चाहिए?” बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई से विलफुल डिफॉल्टर की सूची का खुलासा करने को कहा था।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद आरबीआई ने लोगों को नाम का खुलासा नहीं किया। इसके कारण सीआईसी ने नाराजगी जताते हुए आरबीआई को को कारण बताओ नोटिस भी भेजा था।

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