बंजर खेत में चक्कर काटते-काटते गिरती गईं 24 गायें, सभी की मौत, फतेहपुरसीकरी में मचा हड़कंप; मथुरा में हो रही जांच

राष्ट्रीय जजमेंट

फतेहपुर सीकरी (आगरा)। ब्लॉक क्षेत्र के गांव दूरा में निजी गौशाला से फसल कटाई के पश्चात खेतों में चारा खाने गई गए अचानक चक्कर खाकर इधर भागने लगी। दो किलोमीटर के क्षेत्र में 24 गायों की मृत्यु हो गई।
घटना से गांव में एवं आसपास क्षेत्र में हड़कंप मच गया।

बड़ी संख्या में गायों की मौत की खबर से पुलिस टीम, पशुपालन टीम, पशु चिकित्सा अधिकारी मौके पर पहुंचे। आधा दर्जन गायों को उपचार देकर बचा लिया गया है। गांव दूरा निवासी महावीर सिंह धत्त बाबा के नाम से प्रचलित हैं। दो दशक से ज्यादा समय से सिकरौदा रोड पर निजी गोशाला संचालित है।

गोशाला में 100 से ज्यादा गोवंशी मौजूद है। उनके पुत्र संतु सिंह ने बताया है। रविवार को हाल की ब्याही, चार गर्भवती व अन्य गायों को चारा चराने के लिए सुनहरा रोड के बंजर खेत पर ले गए थे। बंजर खेत में चारा खाने के दौरान एक गाय को चक्कर काटते देखकर उन्हें अचंभा हुआ।

देखते ही देखते कई गाय चक्कर काट कर भागने लगीं। थोड़ी देरी में एक बछड़ा एवं 24 गाय की मौत हो गई। आधा दर्जन गाय जमीन पर गिरकर तड़पने लगीं। बड़ी संख्या में गायों के मरने की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई। क्षेत्र में हड़कंप मच गया। पशु चिकित्सा अधिकारी ने टीम के साथ पहुंचकर तड़पती गायों को उपचार देकर बचाया गया।

प्रशासन एवं पुलिस टीमों ने जेसीबी बुलाकर मृतक गोवंशी को गड्ढे खुदवा कर अंतिम निस्तारण किया गया। जिससे किसी प्रकार के संक्रमण फैलाव को रोका जा सके।

मृतक गोवंशियों का लिया सैंपल

खेतों में चारा चरने के काल के गाल में समाई गोवंशी के सैंपल लेकर पोस्टमार्टम किया गया है। पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय तोमर ने बताया कि चार गर्भवती समेत मृतक 14 गाय व एक बछड़ा का पोस्टमार्टम एवं सैंपलिंग की गई है। छह गायों को उपचार देकर बचा लिया गया है।

प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के पश्चात ही गोवंशियों के मौत का कारण का पता चल सकेगा। प्रभारी निरीक्षक आनंद वीर सिंह ने बताया है। मृतक 17 गायों के शव को दफन कराया गया है। एक मृत गाय को मथुरा वेटेरिनरी विश्वविद्यालय विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है।

इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद भी तहसील प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंच पाया। अखंड भारत परशुराम सेना के संयोजक शिशुपाल कटारा एवं ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन के अधिकारियों की घटना की अनदेखी पर आक्रोश व्यक्त किया है।

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