अखिलेश के बाद मैदान में उतरने की तैयारी में मायावती, इस दिन होगा शक्ति प्रदर्शन

प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सियासी पारा चढ़ने लगा है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव रविवार को चुनावी अभियान की शुरुआत करने के बाद, अब बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने भी रणनीति तैयार की है।
आगामी 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर बसपा पूरे प्रदेश में एक विशाल शक्ति प्रदर्शन करने जा रही है। इस दिन को पार्टी अपने चुनावी शंखनाद के रूप में देख रही है, जिसका मुख्य केंद्र लखनऊ का अंबेडकर स्मारक होगा।

आकाश आनंद को मिली बड़ी जिम्मेदारी

बसपा सूत्रों के अनुसार, इस बार का शक्ति प्रदर्शन केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद को संगठन को धार देने और युवाओं को जोड़ने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। अगस्त 2025 में दोबारा कमान संभालने के बाद, मायावती ने संकेत दिए हैं कि आकाश आनंद अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उनके नेतृत्व में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जनसभाओं का दौर शुरू होगा। पार्टी का मुख्य उद्देश्य दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ को और मजबूत करना और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद से मिल रही चुनौतियों का मजबूती से मुकाबला करना है।

सपा के ‘PDA’ कार्ड की काट तलाश रहीं मायावती

समाजवादी पार्टी के ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले ने बसपा की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अखिलेश यादव द्वारा गौतमबुद्धनगर के दादरी से अभियान शुरू करने की घोषणा के बाद मायावती ने अपने कैडर को विशेष रूप से सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों से कहा है कि वे दलित बहुल क्षेत्रों में जाकर सपा की रणनीति का पर्दाफाश करें और बसपा के मूल कैडर को बिखरने से बचाएं। मायावती खुद बूथ स्तर की कमेटियों के कार्यों की समीक्षा कर रही हैं ताकि चुनाव से पहले संगठन में कोई भी कमजोरी न रहे।

बूथ स्तर पर तैयारी और ‘मार्च’ का लक्ष्य

बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल को मार्च के अंत तक सभी बूथ समितियों के गठन का कार्य पूरा करने का कड़ा निर्देश दिया गया है। लखनऊ और आसपास के जिलों में लगातार बैठकें कर कार्यकर्ताओं को 14 अप्रैल के मेगा शो के लिए तैयार किया जा रहा है। पार्टी नेताओं का दावा है कि अधिकांश कमेटियां तैयार हो चुकी हैं और इनकी रिपोर्ट सीधे मायावती को सौंपी जाएगी। 14 अप्रैल का यह शक्ति प्रदर्शन न केवल बसपा की एकजुटता दिखाएगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि आने वाले चुनावों में मायावती का ‘हाथी’ कितनी मजबूती से सोशल इंजीनियरिंग के रास्ते पर आगे बढ़ता है।

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