सिग्नेचर ब्रिज का उद्घाटन CM केजरीवाल ने किया और कहा,मंदिर-मस्जिद की नही बल्कि विकास की जरूरत है

0 238
नई दिल्ली,। यमुना नदी पर बने बहुप्रतीक्षित सिग्नेचर ब्रिज को लेकर सियासत जारी है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आखिरकार इस ब्रिज का उद्घाटन कर दिया है।

ब्रिज के उद्घाटन समारोह में केजरीवाल ने कहा कि लालकिला, कुतुबमीनार के बाद अब सिग्नेचर ब्रिज के नाम से दिल्ली को जाना जाएगा।

सीएम ने कहा कि यह ब्रिज इसलिए बन सका क्योंकि आज ईमानदार सरकार है। काम रोकने का प्रयास किया गया और अधिकारियों को डराया गया। 
केजरीवाल ने पहले देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु की तारीफ भी ही। उन्होंने कहा कि नेहरू बड़े संस्थान न बना कर मंदिर बना देते,
182 मीटर का स्टेच्यू बना देते तो क्या आज देश विकास कर पाता। उन्होंने कहा कि देश को मंदिर-मस्जिद की नहीं, विकास की जरूरत है।
इसलिए मनोज तिवारी को नहीं बुलाया गया 
समारोह में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, लोक निर्माण मंत्री सहित पूरा मंत्रिमंडल, पार्टी के सभी सांसद, विधायक व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
उद्घाटन कार्यक्रम में सिसोदिया ने कहा कि हमारे पैसे से स्काईवॉक का उद्घाटन करते हो औए हमारे मुख्यमंत्री को नहीं बुलाते हो। इसलिए मनोज तिवारी को कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया।
सोमवार से यह जनता के लिए खोल दिया जाएगा। यह ब्रिज अपनी खूबसूरती के लिए चर्चा में है।

इससे पहले सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन कार्यक्रम में उस वक्त हंगामा शुरू हो गया था जब केजरीवाल से पहले दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी अपने समर्थकों के साथ उदघाटन कार्यक्रम में पहुंच गए थे।
इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर भाजपा नेता को मंच पर जाने से पहले ही पुलिस ने रोक दिया, जिसके बाद भारी हंगामा शुरू हो गया।तिवारी मंच पर जाने के लिए अड़े रहे जिसके बाद उन्हें रोकने के लिए मानव श्रृंखला बनाई गई है। 

उद्घाटन कार्यक्रम में हंगामे के दौरान मनोज तिवारी ने कहा कि मुझे उद्घाटन समारोह में आमंत्रित किया गया था। मैं यहां से सांसद हूं। ऐसे में समस्या क्या है? क्या मैं एक अपराधी हूं? पुलिस ने मुझे क्यों घेर लिया?
मैं यहां उनका (अरविंद केजरीवाल का) स्वागत करने के लिए हूं। ‘आप’ समर्थकों और पुलिस ने मेरे साथ दुर्व्यवहार किया है। भाजपा नेता ने कहा कि  ‘मैंने ब्रिज के निर्माण को दोबारा शुरू कराया था और
अब अरविंद केजरीवाल उद्घाटन समारोह आयोजित कर रहे हैं।’ मनोज तिवारी के पहुंचने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने जय-जय मोदी, हर-हर मोदी के नारे लगाए तो वहीं आम आदमी पार्टी के समर्थकों केजरीवाल जिन्दाबाद के नारे लगाए। 
सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन से पहले हंगामे को देखते हुए दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा था कि 
सिग्नेचर ब्रिज उद्घाटन स्थल पर भाजपा द्वारा हंगामा। यह दिल्ली सरकार का कार्यक्रम है। पुलिस मूक दर्शक बनी हुई है। एलजी, दिल्ली पुलिस के प्रमुख होने के नाते, सिग्नेचर ब्रिज उद्घाटन स्थल पर शांति और व्यवस्था सुनिश्चित करें।

तिवारी ने ट्वीट कर कहा था कि ‘रविवार को दोपहर तीन बजे वह अपने संसदीय क्षेत्र में सिग्नेचर ब्रिज पर रहेंगे। वहां पर वह हरियाणा से घूमकर पुल का उद्घाटन करने आ रहे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का स्वागत करेंगे।
उन्होंने कहा कि वह सांसद हैं और उनके क्षेत्र में मुख्यमंत्री आ रहे हैैं इसलिए उनका स्वागत करना उनका कर्तव्य है।’ उन्होंने कहा कि 675 मीटर लंबा पुल बनाने में 15 साल और 15 सौ करोड़ रुपये लग गए। यह बेहद शर्मनाक है।
आम आदमी पार्टी की सरकार के समय जनता को समर्पित होने वाली यह सबसे बड़ी परियोजना है। सोमवार से यह जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
यह ब्रिज अपनी खूबसूरती के लिए चर्चा में है। मुख्य आकर्षक 154 मीटर ऊंचे मुख्य पिलर के ऊपर चढ़कर लोग दिल्ली को निहार सकेंगे।
पिलर के ऊपरी 22 मीटर के भाग में चारों तरफ शीशे लगाए जाएंगे। इसका काम चल रहा है जो 31 मार्च तक पूरा होगा। ब्रिज के ऊपरी भाग में रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक काम पूरा किया जाएगा।
लिफ्ट के जरिये जब लोग ऊपरी भाग में पहुंचेंगे तो उन्हें यहा से दिल्ली का टॉप व्यू देखने को मिलेगा। इसकी उंचाई कुतुबमीनार से दोगुनी है।
ब्रिज पर 15 स्टे केबल्स हैं जो बूमरैंग आकार में हैं, जिन पर ब्रिज का 350 मीटर भाग बगैर किसी पिलर के रोका गया है। ब्रिज की कुल लंबाई 675 मीटर और चौड़ाई 35.2 मीटर है।

यमुना नदी पर इस ब्रिज के बन जाने से उत्तर-पूर्वी दिल्ली के यमुना विहार गोकुलपुरी भजनपुरा और खजूरी की तरफ से मुखर्जी नगर, तिमारपुर, बुराड़ी और आजादपुर जाने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
जो लोग रोजाना वजीराबाद पुल से सफर करते हैं, उन्हें आधा से एक घटे का समय जाम के कारण लग जाता है। अब 10 मिनट में यह दूरी तय कर करेंगे।
सिग्नेचर ब्रिज बनाने की योजना 2004 में बनी थी। उस समय इसकी लागत करीब 464 करोड़ रुपये अनुमानित थी। साल 2007 में शीला दीक्षित कैबिनेट ने इसको मंज़ूरी दी।
शुरुआत में लक्ष्य रखा गया कि इसको 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन, इसके निर्माण की शुरुआत ही कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले मार्च 2010 में हो पाई।
यह भी पढ़ें: लखनऊ में अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट मैच अखिलेश की देन: राजेन्द्र चौधरी
साल 2011 में इसकी कीमत बढ़कर 1131 करोड़ रुपये हो गई और अब यह आखिरकार 1518.37 करोड़ रुपये में बनकर तैयार हुआ है।

Leave A Reply

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More