लखनऊ में रेलमंत्री की टिप्पणी से नाराज कर्मचारियों ने किया हंगामा

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रेलमंत्री पीयूष गोयल की यूनियन नेता शिवगोपाल मिश्र को संबोधित एक टिप्पणी पर शुक्रवार को हंगामा मच गया। कर्मचारी मंच की ओर बढ़े और मंत्री का घेराव करते हुए वहीं लेट गए और नारेबाजी करने लगे।
लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेडियम में चल रहे नार्दर्न रेलवे मेंस यूनियन के तीन दिवसीय अधिवेशन में रेलमंत्री पीयूष गोयल दूसरे दिन पहुंचे।
अराजकता और हंगामा बढऩे पर मंत्री के सुरक्षाकर्मी जब उन्हें बाहर ले जा रहे थे तो उन्हें लक्ष्य करके एक गमला भी फेंका गया। मंत्री इसमें बाल-बाल बचे जबकि गमला आरपीएफ जवान को लगा।
अधिवेशन के मंच पर लखनऊ की मेयर संयुक्ता भाटिया व कर्मचारी यूनियन के केंद्रीय नेता भी थे। पीयूष गोयल ने माइक संभालते ही बताया कि वह दो टूक कहना पसंद करते हैं।
इसके बाद अप्रेंटिसशिप के मसले पर वह ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के केंद्रीय महामंत्री शिव गोपाल मिश्र को संबोधित कर बोले, ‘आप लोग (यूनियन) क्यों युवाओं को गलत रास्ता दिखा रहे हैं। गलत शिक्षा दे रहे हैं।
अप्रेंटिसशिप को लेकर कोर्ट का निर्णय है कि सारी नियुक्तियां पारदर्शिता से हों। अप्रेंटिस कराते हुए कहीं भी ऐसा नियम नहीं है कि आपको कोर्स करने के बाद नौकरी दी ही जाएगी।
हम दे भी दें तो कोर्ट रद कर देगा।’ हालांकि, रेलमंत्री ने यह भी कहा कि, ‘मुझे भी तकलीफ है कि अप्रेंटिस करने के बाद 10-10 साल काम करने पर भी कुछ लोगों को रेलवे से बाहर करना पड़ा।’
रेलमंत्री ने कहा कि जब रेलवे ने 1.30 लाख भर्तियां निकाली तो उन्होंने ही अप्रेंटिस करने वालों के लिए सीटें आरक्षित कीं।
यदि हम सीधे अप्रेंटिस करने वालों को नौकरी देते तो आज कोर्ट में बैठे होते। बेबुनियाद विवाद में रेलवे और यूनियन किसी को लाभ नहीं होता। 
रेलमंत्री ने जैसे ही अपना भाषण खत्म किया, यूनियन नेता शिवगोपाल मिश्र ने मंच संभाला और कड़े तेवर में मंत्री के वक्तव्य की निंदा की। कहा, यूनियन किसी को बहकाती नहीं है। यह रेलकर्मियों का अधिकार है।
रेलकर्मियों ने कई आंदोलनों में सीने पर गोलियां खायी हैं। उनका भाषण सुनते ही करीब पांच हजार कर्मचारियों से भरे हॉल में माहौल बिगडऩे लगा और
सौ से अधिक रेलकर्मियों ने रेलमंत्री को मंच के सामने ही घेर लिया और लेट गए।
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रेलकर्मियों का आक्रोश बढ़ता देख आरपीएफ जवानों ने मोर्चा संभाल लिया और  रेलमंत्री को लेकर वहां से निकल गए।

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