दिल्ली के होटल से चल रहा था साइबर ठगी का मॉड्यूल, 14 आरोपी गिरफ्तार, 8 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े का खुलासा

नई दिल्ली: दिल्ली के शाहदरा जिले के साइबर थाना पुलिस ने अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय एक बेहद शातिर साइबर ठग गिरोह की कमर तोड़ दी है। पुलिस ने एक सुनियोजित छापेमारी के दौरान इस सिंडिकेट के 14 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनके तार सात से अधिक राज्यों और अंतरराष्ट्रीय गिरोहों से जुड़े हुए हैं। अब तक की जांच में करीब 8 करोड़ रुपये के ठगी के वित्तीय लेन-देन का खुलासा हुआ है। पुलिस ने इनके पास से डिजिटल साक्ष्यों का जखीरा बरामद किया है, जिसमें 18 मोबाइल फोन, 19 सिम कार्ड, लैपटॉप और कई चेकबुक व मुहरें शामिल हैं।

इस बड़े ऑपरेशन की शुरुआत 25 अप्रैल को मिली एक गुप्त सूचना से हुई। शाहदरा जिले के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा के नेतृत्व में गठित विशेष टीम को खबर मिली कि गीता कॉलोनी के एक होटल में कुछ संदिग्ध युवक ठहरे हुए हैं, जो बड़े पैमाने पर ऑनलाइन धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं। एसीपी मोहिंदर सिंह और एसएचओ विजय कुमार की टीम में इंस्पेक्टर श्वेता शर्मा, एसआई श्याम बिहारी, एसआई विवेक, एएसआई राजदीप, हेड कांस्टेबल जावेद, दीपक, नरेंद्र, कपिल और सचिन शामिल थे। टीम ने जब होटल पर छापा मारा, तो वहां का नजारा देख अधिकारी भी दंग रह गए। अलग-अलग कमरों में बैठकर 12 युवक लैपटॉप और मोबाइल के जरिए टेलीग्राम पर ठगी का जाल बुन रहे थे। मौके से हुई पूछताछ के बाद पुलिस ने पंजाब के लुधियाना में दबिश देकर मुख्य सरगना प्रदीप उर्फ अल्फा और उसके साथी गेवी को भी दबोच लिया।

पकड़े गए आरोपितों ने पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। यह गिरोह मुख्य रूप से उन बेरोजगार युवाओं और लोगों को निशाना बनाता था जो ऑनलाइन कमाई की तलाश में रहते थे। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के जरिए ये लोगों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ या ‘पार्ट टाइम जॉब’ का आकर्षक ऑफर देते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति इनके जाल में फंसता, उसे तुरंत टेलीग्राम ऐप पर शिफ्ट कर दिया जाता था। टेलीग्राम की गोपनीयता का फायदा उठाकर ये जालसाज खुद को नामी कंपनियों के अधिकारी बताते थे और पीड़ितों को फर्जी नियुक्ति पत्र तक जारी कर देते थे।

आरोपितों ने बताया कि वे बेहद सलीके से ठगी करते थे। पहले पीड़ितों से छोटे-छोटे टास्क (जैसे वीडियो लाइक करना या रिव्यू देना) कराए जाते थे और बदले में 200-500 रुपये का भुगतान कर उनका विश्वास जीता जाता था। एक बार भरोसा कायम होने के बाद, पीड़ितों को ‘वीआईपी टास्क’ और ‘हाई रिटर्न इन्वेस्टमेंट’ के नाम पर बड़े निवेश के लिए उकसाया जाता था। रजिस्ट्रेशन फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट और टैक्स के नाम पर लाखों रुपये जमा कराने के बाद, ये गिरोह अचानक टेलीग्राम ग्रुप से पीड़ित को ब्लॉक कर देता था।

जांच में यह बात भी सामने आई कि गिरोह ने ठगी की रकम को खपाने के लिए देशभर में ‘म्यूल अकाउंट्स’ का जाल बिछा रखा था। जांच के दौरान मिला एक अकेला केनरा बैंक का एटीएम कार्ड करीब 3 करोड़ रुपये की ठगी के लेन-देन से जुड़ा पाया गया। वहीं, गिरोह द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे एक अन्य खाते में देशभर से 40 अलग-अलग साइबर शिकायतें दर्ज मिली हैं। पुलिस अब इन खातों के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठगी गई रकम को क्या क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर विदेश भेजा गया है।

पुलिस ने गिरफ्तार किए गए 14 आरोपित देश के विभिन्न कोनों से ताल्लुक रखते हैं। आरोपियों की पहचान प्रदीप सिंह उर्फ अल्फा (सरगना), संदीप सिंह, हरसिमरन पाल सिंह, गेवी, साहिल, परमेंदर सिंह और गुरदीप सिंह (सभी निवासी लुधियाना, पंजाब) के रूप में हुई है। इनके साथ ही गिरोह में शामिल विशाल कुमार (सीवान, बिहार), अजीत कुमार पांडे (लखनऊ, उत्तर प्रदेश), सैयद जीशान अली व सैयद आदिल हुसैन (हैदराबाद, तेलंगाना), स्वराज कुमार गुप्ता (जलपाईगुड़ी, पश्चिम बंगाल), राजू कोनवार (धेमाजी, असम) और अनिल कुमार अहिरवार (जबलपुर, मध्य प्रदेश) को भी गिरफ्तार किया गया है।

डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनजान नंबर से आने वाले नौकरी के प्रस्तावों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें। उन्होंने कहा कि कोई भी प्रतिष्ठित कंपनी नौकरी देने के नाम पर पैसे की मांग नहीं करती। टेलीग्राम या व्हाट्सएप पर होने वाले संदिग्ध निवेश के दावों से दूर रहें और किसी भी साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More