चुनाव के दौरान रोज घट रहे, पेट्रोल-डीजल के दाम

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पेट्रोल की कीमतें पिछले तीन महीनों के न्यूनतम स्तर पर हैं, वहीं डीजल दो महीने के अपने सबसे कम रेट पर बिक रहा है। तेल की कीमतों में कमी से सत्ताधारी पार्टी बीजेपी को थोड़ी राहत जरूर मिली है। क्योंकि, इसका सीधा असर लोगों पर पड़ रहा था और नाराजगी सरकार से बढ़ रही थी।
हालांकि, पांच राज्यों में चुनावों के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगी आग अब धीरे-धीरे शांत होने लगी है। कीमतें अपने पुराने ढर्रे पर लौट रही हैं। अतंरराष्ट्रीय व्यापार की परिस्थितियां बदली हैं और अगस्त महीने में छलांगे मार रही पेट्रोलियम की कीमतें एक महीने के भीतर काफी कम हुई हैं।
एक महीने के भीतर पेट्रोल की कीमतों में 8 रुपये और डीजल की कीमतों में करीब 4.40 रुपये की कमी आयी है। फिलहाल दिल्ली में पेट्रोल 76.38 रुपये और डीजल 71.27 रुपये प्रति लीटर के भाव से बिक रहा है।
वहीं, मुंबई में पेट्रोल 81.90, चेन्नई में 79.31, बेंगलुरू में 76.99 और कोलकाता में 78.31 प्रति लीटर के हिसाब से मिल रहा है। जबकि, डीजल मुंबई में 74.66 रुपये, चेन्नई में 75.31, बेंगलुरू में 71.65 और कोलकाता में 73.13 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
राजस्थान में तेल की कीमतें काफी हद तक बीजेपी का चुनावी खेल बिगाड़ रही थीं। लेकिन, अब एक महीने में कीमतों में कमी आने से लोगों का गुस्सा कुछ जरूर कम हुआ है। अक्टूबर में एक लीटर पेट्रोल की कीमत जोधपुर शहर में 84.96 रुपये थी।
वहीं, डीजल 78.21 रुपये प्रति लीटर के भाव से बिका। लेकिन, अब परिस्थितियां बदल रही हैं। रविवार को जोधपुर में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 77.18 रुपये और डीजल 73.81 रुपये प्रति लीटर है। हालांकि, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में गिरावट अंतरराष्ट्रीय कारणों से आई है।
तेल के दाम कम होने से अब यातायात और मालढुलाई सस्ता होने की उम्मीद है। इसके साथ ही वस्तुओं की कीमतें भी कम हो सकती हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि तेल की कीमतों में इजाफे से मुद्रा-स्फिति का जो संकट बना था वह फिलहाल टल गया है।
दरअसल, इन सभी आर्थिक मामलों के लिए अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां जिम्मेदार थीं और देश में स्थिति सही होने के लिए काफी हद तक वही जिम्मेदार हैं। तेल की कीमतों में आग तब लगी जब अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाया और भारत को उससे तेल नहीं खरीदने का दबाव बनाया।
चूंकि, भारत तेल की बड़ी खपत ईरान से आयात करता है ऐसे में कम कीमत पर तेल की पूरी खपत नहीं होने से देश में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ गयीं। लेकिन, पिछले महीने अमेरिका के रुख में नरमी आने के बाद भारत का ईरान के साथ तेल-व्यापार फिर से बहाल हुआ है और
कीमतों में इजाफे का संकट फिलहाल टल गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत प्रति बैरल 86 डॉलर तक पहुंच गयी थी। लेकिन, अब यह 65 डॉलर प्रति बैरल तक आ गयी है।
सबसे बड़ी बात कि समय रहते भारत की मुद्रा रुपया में भी काफी सुधार हुआ है। बीते कुछ दिनों में डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती देखी गयी है। पहले जहां एक डॉलर की कीमत 74.48 पहुंच गयी थी, वहीं अब फिर से यह कम होकर 72 रुपये हो गया है।
रुपये की स्थित में सुधार होने की वजह से आयात की कीमतों में भी थोड़ राहत मिली है। हालांकि, इसे सत्ताधारी पार्टी के लिए राहत की बात कहेंगे कि
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अतंरराष्ट्रीय व्यापार की परिस्थितियां चुनाव से ठीक पहले भारत के हक में होने लगी हैं।

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