बिहार में बड़े पैमाने पर चल रहा रहा है नशे का कारोबार

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सीमेंट ढोने वाले टैंकर में बने तहखाने से 5 करोड़ के 111 पैकेट गांजा बरामद

पटना (बिहार) : बिहार में शराबबन्दी का साईड ईफेक्ट यह है कि एक तरफ जहाँ अवैद्य शराब की बिक्री बड़े पैमाने पर हो रही है, वहीँ दूसरी तरफ नशे के अन्य सामानों की बिक्री जम कर हो रही है। ताजा मामला बिहार के औरंगाबाद जिले की है।

नशे के कारोबार के खात्मे में लगी औरंगाबाद पुलिस ने गांजे की एक बड़ी खेप को बरामद किया है। जब्त किए गये गांजे की अंतराष्ट्रीय बाजार में कीमत 5 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। इस बात की जानकारी एसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने दी।

एसपी ने बताया कि मदनपुर थानाध्यक्ष संजय कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि एक सीमेंट ढ़ोने वाले टैंकर में बने तहखाने में गांजा छिपाकर उड़ीसा से मदनपुर होते हुए आरा ले जाया जा रहा है। इस बात की सूचना मिलते ही, एक विशेष छापेमारी टीम की गठन किया गया। छापेमारी के दौरान सीमेंट ढ़ोने वाले डब्ल्यूबी 73-D 3031 टैंकर को पकड़ा गया।

इस दौरान पुलिस को देखते ही ड्राइवर और खलासी टैंकर में अपना मोबाइल छोड़कर फरार हो गया। जिसके बाद टैंकर में बने तहखाने से 111 पैकेट गांजा बरामद किया गया। इस दौरान कुल 5 क्विंटल 79 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया। गांजे की कीमत 5 करोड़ रुपये बतायी जा रही है।

औरंगाबाद एसपी ने बताया कि छापेमारी टीम में लगे सभी पुलिसकर्मियों को पुरस्कृत किया जाएगा। पुलिस ने छापेमारी में 111 पैकेट गांजा और दो मोबाइल फोन जब्त किया है। वाकई, यह पुलिस की बड़ी कामयाबी है। लेकिन ऐसी कामयाबी इस बात की तकसीद करती है कि पुलिस को उनकी मूल जिम्मेवारी की जगह, उन्हें अलग कार्य में लगा दिया है। ऐसे में, आपराधिक घटनाओं पर नकेल कसना, पुलिस के बूते से बाहर होता प्रतीत हो रहा है।

मुकेश कुमार सिंह

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