यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम, जुलाई तक शुरू होगा गोयला डेयरी बायोगैस प्लांट, महापौर ने निर्माणाधीन संयंत्र का किया निरीक्षण

नई दिल्ली: दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही ने मंगलवार को नजफगढ़ जोन के अंतर्गत गोयला डेयरी में निर्माणाधीन बायोगैस संयंत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। महापौर ने स्पष्ट किया कि दिल्ली को स्वच्छ और हरित राजधानी बनाना निगम की प्राथमिकता है और इस दिशा में यह संयंत्र मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि प्लांट के निर्माण और संचालन में किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। महापौर के अनुसार, यह संयंत्र आगामी जुलाई माह तक बनकर तैयार हो जाएगा, जिससे क्षेत्र के लोगों को गंदगी और प्रदूषण से बड़ी राहत मिलेगी।

निरीक्षण के दौरान महापौर के साथ नजफगढ़ जोन की अध्यक्ष सविता शर्मा, अतिरिक्त आयुक्त बी.एस. जगलान और उपायुक्त सुमित कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। वाही ने बताया कि नंगली और गोयला क्षेत्रों में लगभग 1,500 डेयरियां संचालित हो रही हैं, जिनसे निकलने वाला गोबर अक्सर नालियों के जरिए नजफगढ़ ड्रेन और अंततः यमुना नदी में जाकर उसे प्रदूषित करता है। गोयला संयंत्र के शुरू होने से प्रतिदिन 200 टन पशु गोबर का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण संभव हो सकेगा, जिससे न केवल स्वच्छता बढ़ेगी बल्कि यमुना को भी प्रदूषण से बचाया जा सकेगा।

महापौर ने कहा कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के विजन के अनुरूप नगर निगम पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि नंगली सक्रावती बायोगैस प्लांट पहले ही स्थापित किया जा चुका है और अब गोयला प्लांट के तैयार होने से निगम की गोबर निस्तारण क्षमता में भारी इजाफा होगा। निरीक्षण के दौरान महापौर ने अधिकारियों को सभी संबंधित एजेंसियों के साथ बेहतर तालमेल बिठाने और लंबित कार्यों को अतिशीघ्र पूरा करने को कहा ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था सुदृढ़ हो सके।

इस अवसर पर महापौर ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए संयंत्र परिसर में वृक्षारोपण भी किया। उन्होंने स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों को विश्वास दिलाया कि निगम ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। महापौर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से कार्यों की प्रगति की समीक्षा करें ताकि जुलाई माह की समय-सीमा के भीतर यह प्लांट जनता को समर्पित किया जा सके। इस सक्रियता से न केवल स्थानीय निवासियों में उत्साह है, बल्कि यमुना की शुचिता की दिशा में भी इसे एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More