टीपू जयंती का विरोध करने वाला पत्रकार नफरत फैलाने के आरोप में गिरफ्तार

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अब खबर आयी है कि कर्नाटक सरकार ने टीपू जयंती के विरोध में कुछ लिखने के आरोप में एक पत्रकार और लेखक संतोष थमैय्या को गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी सोमवार की रात बेंगलुरु में पत्रकार के घर से ही की गई।
संतोष थमैय्या की गिरफ्तारी से टीपू जयंती विवाद को नई हवा मिल गई है। संतोष थमैय्या कई राष्ट्रवादी किताबों के लेखक हैं। पुलिस का कहना है कि संतोष थमैय्या ने टीपू जयंती के खिलाफ लिखे लेख में ऐसी बातें लिखी हैं, जिनसे अल्पसंख्यकों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
दक्षिण भारत के राज्य कर्नाटक में इन दिनों टीपू जयंती को लेकर राजनीति गरमायी हुई है। भारतीय जनता पार्टी और विभिन्न हिंदूवादी संगठन बीते 10 नवंबर को मनायी गई टीपू जयंती का विरोध कर रहे हैं और जगह जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
वहीं बड़ी संख्या में लोग संतोष थमैय्या के समर्थन में आ गए है और राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। भाजपा ने भी संतोष थमैय्या की गिरफ्तारी की कड़ी आलोचना की है और राज्य में ‘आपातकाल जैसे’ हालात बताए हैं।
भाजपा ने कांग्रेस और जनता दल सेक्यूलर की गठबंधन सरकार पर ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ को कुचलने का आरोप लगाया है। भाजपा का कहना है कि ‘हिंदू खतरे में हैं’ और
सरकार पर ‘हिंदू विरोधी’ होने का आरोप लगाया। भाजपा का कहना है कि सरकार अल्पसंख्यकों को खुश करने के लिए ये सब कर रही है।
चिकमंगलुरु इलाके से भाजपा विधायक और पार्टी महासचिव सीटी रवि ने कहा है कि “संतोष थमैय्या ने टीपू सुल्तान द्वारा हिंदुओं पर किए गए अत्याचारों के बारे में बोला तो कर्नाटक की ‘सांप्रदायिक सरकार’ द्वारा उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
कुछ छद्म बुद्धिजीवी लगातार हिंदू भगवानों के बारे में गलत बयानबाजी कर रहे हैं, लेकिन वो आराम से आजाद घूम रहे हैं।” बता दें कि भाजपा और कुछ हिंदूवादी संगठनों का मानना है कि टीपू सुल्तान के राज में हिंदुओं पर अत्याचार किए गए और वह हिंदू और कन्नड भाषा का विरोधी था।
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वहीं कांग्रेस टीपू सुल्तान को एक नायक और अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाने वाला महान योद्धा मानती है। यही वजह है कि कर्नाटक में पिछले कुछ समय से टीपू जयंती, विवाद का विषय बन गई है।

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