जब चलती ट्रेन के बाहर, लटक इंजन तक पहुंच जाते थे आशुतोष राणा

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एक्टर आशुतोष राणा अपनी डायलॉग डिलीविरी के लिए जाने जाते हैं। आशुतोष ने कहा कि ‘मैं बचपन में बेहद मनमौजी था। कॉलेज के दिनों में दोस्तों संग शर्त लगाना मेरी आदतों में शुमार था। उन दिनों ट्रेन में एसी के डिब्बे नहीं होते थे।
हम खिड़कियों के सहारे बाहर से लटक कर इंजन तक पहुंचते थे। ट्रेनों में गार्ड के डिब्बे से इंजन तक पहुंच जाते थे। शर्त वह जीतता था जो सबसे पहले इंजन तक पहुंचत जाता था।’
हालांकि आशुतोष ने ये भी कहा कि ऐसा करना बेहद खतरनाक है और ऐसा करने पर लोगों की ज़िंदगी तक खतरे में पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि ‘अब कोई ऐसा न करे।
यह गलत है और खतरनाक भी है। मुझे भी अब फिल्मों में अगर इसे करने को कहा जाएगा तो मैं मना कर दूंगा।’
आशुतोष राणा ने अपनी वाइफ और एक्टर रेणुका शहाने के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि ‘मै और रेणुका जी दोनों एक दूसरे से एकदम अलग है। वे शहर के माहौल में पली-बढ़ी हैं और मैं ठेठ ग्रामीण आदमी हूं।
वे वक्त को लेकर बेहद पाबंद हैं तो मैं समय को लेकर बेतरतीबी और लापरवाही बरत देता हूं। वे जल्दी सोना पसंद करती हैं और रात को 10 बजे किसी को फोन आने पर उसका नंबर ब्लॉक कर देती हैं पर मेरी दिनचर्या ही रात 10 बजे शुरू होती है।
मैं कविता प्रेमी हूं और उन्हें कविता बिल्कुल पसंद नहीं है। एक बार जब वे गोवा में शूटिंग कर रही थीं तो मैंने उन्हें एक कविता सुनाई।
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यह कविता सुनने के बाद उन्होंने मुझसे अपने प्यार का इज़हार किया था। आज हमारी शादी को 17 साल हो चुके हैं।’

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