धधकते मकान में घुसकर पुलिसकर्मियों ने बचाई 1 साल के मासूम समेत 3 जिंदगियां; खाना बनाते समय गैस सिलेंडर लीक होने से लगी थी आग

नई दिल्ली: दिल्ली के शाहदरा जिला अंतर्गत गांधी नगर इलाके में दिल्ली पुलिस के जवानों का एक बेहद मानवीय, साहसिक और प्रेरणादायक चेहरा सामने आया है। बीट पेट्रोलिंग के दौरान मुस्तैदी और अदम्य साहस का परिचय देते हुए शाहदरा पुलिस के जांबाज कर्मियों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए आग की भयंकर लपटों से घिरे एक मकान में प्रवेश किया। पुलिस टीम ने सूझबूझ से काम लेते हुए पहली मंजिल पर फंसे एक ही परिवार के तीन सदस्यों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिनमें महज 1 साल का एक मासूम बच्चा भी शामिल है।

आग की यह घटना खाना बनाते समय गैस सिलेंडर से गैस रिसाव (लीकेज) होने के कारण हुई थी। पुलिस ने सभी घायलों को बिना समय गंवाए स्थानीय ऑटो रिक्शा की मदद से तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस की इस त्वरित और मानवीय कार्रवाई की पूरे इलाके में जमकर तारीफ हो रही है।

शाहदरा जिले के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि यह रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा गांधी नगर इलाके के अजीत नगर में घटित हुआ। घर की रसोई में खाना पकाने के दौरान अचानक एलपीजी सिलेंडर से गैस का रिसाव होने लगा, जिसने देखते ही देखते विकराल आग का रूप ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि मकान की पहली मंजिल पर स्थित एक कमरे में मौजूद परिवार के सदस्य अंदर ही फंस गए और बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया।

उसी समय, शाहदरा जिला पुलिस के बीट स्टाफ में तैनात असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर कुलदीप, हेड कांस्टेबल राहुल, कांस्टेबल विपिन और कांस्टेबल सनी इलाके में अपनी नियमित गश्त और कानून व्यवस्था की निगरानी पर थे। जैसे ही गश्ती दल ने अजीत नगर इलाके से धुएं का गुबार और आग की लपटें उठती देखीं, वे तुरंत मौके की तरफ दौड़े। वहां पहुंचते ही उन्हें पता चला कि भीषण आग के बीच घर के अंदर लोग फंसे हुए हैं और अंदर से चीखने-चिल्लाने की आवाजें आ रही हैं।

दमकल विभाग या अतिरिक्त पुलिस बल के पहुंचने का इंतजार किए बिना, चारों पुलिसकर्मियों ने कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश की। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर धधकती हुई इमारत के भीतर प्रवेश किया। पहली मंजिल का कमरा पूरी तरह आग और दमघोंटू काले धुएं की चपेट में आ चुका था। पुलिसकर्मियों ने अदम्य साहस और अत्यधिक फुर्ती दिखाते हुए कमरे का दरवाजा खोलकर अंदर फंसे तीनों लोगों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

आग से झुलसे और धुएं के कारण बेहाल हुए पीड़ितों की गंभीर स्थिति को देखते हुए एएसआई कुलदीप और उनकी टीम ने एम्बुलेंस का इंतजार करने में समय बर्बाद नहीं किया। उन्होंने तुरंत मौके पर एक ऑटो रिक्शा का इंतजाम किया और तीनों को इलाज के लिए जग प्रवेश चंद्र अस्पताल में भर्ती कराया, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी देखरेख कर रही है।

अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, आग से बचाए गए घायलों की पहचान 34 वर्षीय अरशद अली, उनकी 28 वर्षीय पत्नी अर्शना और उनके 1 वर्ष के बेटे अरमान अली के रूप में हुई है। ये सभी इसी मकान के निवासी हैं। डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि बीट स्टाफ की इस त्वरित प्रतिक्रिया और बहादुरी के कारण एक बहुत बड़ी त्रासदी टल गई और एक पूरा परिवार सुरक्षित बच गया। स्थानीय पुलिस अब आग लगने के सटीक तकनीकी कारणों की आगे की जांच कर रही है।

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