जिसे कुछ छुपाना है वही CBI को रोक रहे हैं

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अरुण जेटली ने कहा कि केवल वही लोग सीबीआइ को रोकना चाहते हैं, जिनके पास बहुत कुछ छिपाने के लिए है। बता दें कि आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने सीबीआइ को राज्य में किसी भी तरह की जांच से रोक दिया है।
आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सीबीआइ को किसी भी तरह की जांच से रोके जाने पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्य सरकारों पर निशाना साधा है।
केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ‘केवल वही लोग राज्य में सीबीआइ के आने पर रोक लगा रहे हैं, जिनके पास छिपाने के लिए बहुत कुछ है। भ्रष्टाचार के मामले में किसी भी राज्य की कोई संप्रभुता नहीं है।
आंध्र की चाल किसी भी विशेष मामले से प्रेरित नहीं है, बल्कि कुछ होने की आशंका को देखते हुए उठाया गया कदम है।’
गौरतलब है कि शुक्रवार को आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल ने सीबीआइ को राज्य में किसी भी तरह की जांच से रोक दिया है। इन दोनों राज्यों के भीतर जांच करने के लिए सीबीआइ को अब यहां की सरकारों से अनुमति लेनी होगी।

आंध्र ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना कानून (डीएसपीई एक्ट) के तहत सीबीआइ को राज्य के भीतर जांच के लिए दी गई शक्ति को समाप्त कर दिया है। आठ नवंबर को इस सिलसिले में अधिसूचना जारी की गई थी।

हालांकि तीन माह पहले सीबीआइ अधिकारियों को राज्य में जांच की सामान्य अनुमति होने की अधिसूचना जारी हुई थी।
आंध्र की राह पर चलते हुए पश्चिम बंगाल ने भी सीबीआइ को राज्य के भीतर जांच के लिए दी गई सहमति वापस ले ली है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर राज्य सरकार की ओर से इस बाबत शुक्रवार देर शाम आनन-फानन में अधिसूचना भी जारी कर दी गई। ममता ने भाजपा पर सीबीआइ और अन्य एजेंसियों का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करने का आरोप लगाया।
सूत्रों के अनुसार, अधिसूचना का सबसे अधिक प्रभाव आंध्र और पश्चिम बंगाल के भीतर मौजूद केंद्र सरकार के उपक्रमों व कार्यालयों में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई पर पड़ेगा।
केंद्रीय उपक्रम में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार सीबीआइ को है। अब एफआइआर दर्ज करने के पहले राज्य सरकार की अनुमति लेनी होगी।

हालांकि राज्य सरकार के भ्रष्टाचार व अन्य मामलों की जांच में फर्क नहीं पड़ेगा, क्योंकि उसके लिए पहले से राज्य सरकार की सहमति लेनी होती है।

हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच एजेंसी पहले की तरह ही भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।
तीन माह में ही अधिसूचना बदलने का कारण चंद्रबाबू नायडू के व्यक्तिगत डर को माना जा रहा है। सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा को दो करोड़ और
विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को दो करोड़ 95 लाख रुपये रिश्वत देने का दावा करने वाला सतीश बाबू सना हैदराबाद का है। उसे नायडू का करीबी माना जाता है।

चर्चा है कि नायडू के साथ उसके लेन-देन के पुख्ता दस्तावेज मौजूद हैं। सना ने सीबीआइ के सामने माना है कि एक तेदेपा सांसद ने उसे बचाने के लिए सीबीआइ निदेशक से बात की थी।

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जांच में इन दस्तावेजों के बाहर आने की संभावना है। नई अधिसूचना के बाद आंध्र में सना के खिलाफ सीबीआइ जांच रोकी जा सकेगी।

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