म्यांमार जाने से बचने के लिए शिविरों से भागे रोहिंग्या

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ये शरणार्थी म्यामां में उनपर हुए अत्याचार के बाद वहां से भाग निकले थे। संयुक्त राष्ट्र ने इस क्रूरता को नस्लीय सफाया नाम दिया था। समुदाय के नेताओं के मुताबिक इस संभावना ने शिविरों में रह रहे लोगों को आतंकित कर दिया और कुछ ऐसे परिवार ,जिन्हें सबसे पहले वापस भेजा जाना था , वहां से फरार हो गए।
जामतोली शरणार्थी शिविर के नूर इस्लाम ने कहा, ‘‘अधिकारी शरणार्थियों को लगातार वापस जाने के लिए प्रेरित करने का प्रयास कर रहे हैं। पर इसके उलट वह भयभीत होकर दूसरे शिविरों में भाग रहे हैं।’’
योजना के तहत बृहस्पतिवार से करीब 2,260 रोहिंग्या मुसलमानों को दक्षिणपूर्वी कॉक्स बाजार जिले की सीमा से स्वदेश वापस भेजा जाना है।
वहीं दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष शरणार्थी अधिकारी ने कहा है कि विस्थापित रोहिंग्या शरणार्थियों की म्यामां वापसी केवल उनकी ‘स्वतंत्र रूप से व्यक्त की गयी इच्छा’ पर होनी चाहिए। संयुक्त राष्ट्र के आकलन के अनुसार पिछले साल 25 अगस्त से करीब सात लाख अल्पसंख्यक रोंिहग्या मुस्लिम म्यामां के रखाइन प्रांत में िहसा से बचने के लिए बांग्लादेश जा चुके हैं।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) फिलिप्पो ग्रेंडी ने रविवार को एक बयान में कहा कि शरणार्थियों की वापसी उनके स्वतंत्र फैसले पर आधारित होनी चाहिए। म्यामां के मुस्लिम अल्पसंख्यक रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ अगस्त 2017 के बाद से हिंसा शुरू हो गयी थी जिसके बाद हजारों लोगों को रखाइन प्रांत में अपने घर छोड़कर बांग्लादेश में शरण लेनी पड़ी।
रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थी उन्हें इस हफ्ते के मध्य में वापस म्यामां भेजे जाने से बचने के लिए बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों से भाग रहे हैं।
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समुदाय के नेताओं ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारी रोहिंग्या शरणार्थियों को बृहस्पतिवार से बौद्ध बहुल म्यामां वापस भेजे जाने की योजना बना रहे हैं।

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