अभी चुनाव हुए तो भाजपा को बढ़त पर 2014 जैसी लहर मुश्किल: प्रशांत किशोर

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प्रशांत किशोर से जब आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखें तो भाजपा अभी भी बढ़त में है। लेकिन जैसा कि सभी जानते हैं कि चुनाव 10-12 दिन में भी पलट सकता है। लेकिन यदि आज चुनाव होता है तो इसमें कोई शक नहीं है कि
भाजपा अकेली सबसे बड़ी पार्टी होगी। हालांकि भाजपा के 272 से ज्यादा सीटें जीतने को प्रशांत किशोर ने मुश्किल बताया। 2014 से लेकर अब तक आए बदलावों की बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि अब लोग जमीनी हकीकत और वादों पर बात करना चाहते हैं, ना कि लोक-लुभावन वादों पर। इसलिए मुझे लगता है कि अगले चुनावों में कोई लहर नहीं होगी और चुनाव छोटे-छोटे मुद्दों पर लड़ा जाएगा। 2019 के चुनाव में लोग उम्मीदवारों को देखकर वोट करेंगे।
आगामी लोकसभा चुनाव नजदीक हैं और देश में राजनैतिक माहौल गरमाया हुआ है। भाजपा के खिलाफ महागठबंधन की सुगबुगाहट है और भाजपा दबाव में दिखाई दे रही है। अब जेडीयू के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर ने भी इंडियन एक्सप्रेस से एक्सक्लूसिव बातचीत में कहा कि पीएम मोदी बड़े नेता हैं, लेकिन साल 2014 जैसी लहर अब थोड़ी मुश्किल दिखाई दे रही है।
प्रशांत किशोर का मानना है कि 2019 के चुनावों में भी डिजिटल प्लेटफॉर्म काफी अहम साबित होगा। जेडीयू उपाध्यक्ष ने कहा कि 2014 में देश में 4-5 करोड़ स्मार्टफोन थे, जो कि अब बढ़कर 35-40 करोड़ हो गए हैं। हालांकि अभी भी देश के 50 प्रतिशत मतदाता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नहीं है।
लेकिन इसके बावजूद सोशल मीडिया अगले चुनाव में अहम भूमिका निभाएगा। चुनावों में महागठबंधन की भूमिका पर प्रशांत किशोर ने कहा कि अकेली पार्टी के लिए जीतना कतई आसान नहीं होगा और जीत के लिए बड़ा गठबंधन जरुरी है लेकिन इसके साथ ही गठबंधन का कोई उद्देश्य भी होना चाहिए, उसकी एक दिशा तय होनी चाहिए।
राम मंदिर को लेकर हो रही राजनीति और इसे लेकर जेडीयू के स्टैंड के सवाल पर प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनावों के दौरान विभिन्न राजनैतिक पार्टियां ऐसे मुद्दों को उठाती हैं, जो उनके पक्ष में काम करें। हालांकि राम मंदिर का फैसला सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ देना चाहिए और सभी को कोर्ट के फैसले का सम्मान करना चाहिए।
जेडीयू के इस मुद्दे पर स्टैंड को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा कि इस पर पार्टी उचित मंच पर विचार-विमर्श करेगी। लेकिन गठबंधन के दौरान कुछ मुद्दे ऐसे होते हैं, जिन पर आपकी सहमति होती है और कुछ ऐसे, जिन पर नहीं होती।
एक अलग पार्टी होने के नाते हम अपना स्टैंड सिर्फ इसलिए नहीं बदलेंगे क्योंकि भाजपा ऐसा चाहती है। 2 लोकसभा सांसद और 4-5 राज्यसभा सांसद के दम पर हम उस स्थिति में भी नहीं हैं कि हम भाजपा को रोक सकें, लेकिन हम अपनी आवाज जरुर उठाएंगे।
प्रशांत किशोर से जब सवाल किया गया कि पहले चर्चा थी कि आप भाजपा ज्वाइन कर सकते हैं, फिर आपने जेडीयू ज्वाइन कैसे की? इसके जवाब में प्रशांत किशोर ने कहा कि वह बिहार में काम करना चाहते थे। साथ ही वह नीतीश कुमार द्वारा बिहार में किए गए कामों से भी काफी प्रभावित हैं।
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वह देश के सबसे अच्छे मुख्यमंत्रियों में से एक हैं। जेडीयू एक छोटी पार्टी है और विचारधारा के स्तर पर कह सकते हैं कि अभी क्लीन स्लेट की तरह है। यही वजह है कि मैं इस पार्टी के साथ ज्यादा सहज महसूस कर पाता हूं।

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