मैं एक सड़क हूं..आज काफी जर्जर-बेहाल हूं।

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बरेली,। मैं एक सड़क हूं.. शहर को बदलते मैंने देखा है। हमकदम और सबकी हमराह भी हूं। नाथ नगरी की पहचान थी कभी, लेकिन अब बेनाम हूं।

 

जिस पर चलकर गुजरे सभी, आज काफी जर्जर-बेहाल हूं। नेता व अफसर नहीं लेते सुध, बस किसी तरह से जिंदा हूं।
एक तरफ बापू का नाम, वही पास में देश का मान, देखकर हालत को मेरी, हो रहे परेशान। क्षीण हो चुकी देह मेरी, शर्मिदा हूं, बेबस हूं और लाचार हूं।
यह दर्द शहर के पॉश इलाके गांधी उद्यान के सामने की सड़क का है। सड़क देखकर लगता है मानो वह अपनी पीड़ा रो-रोकर कह रही है, लेकिन उसे समझने वाला कोई नहीं है।
सड़क की बेहाली तो लोगों की समझ में आती है, लेकिन उसकी मरहम-पट्टंी की सुध कोई नहीं लेता। कुछ दिनों पहले तक सड़क पर वाहन सरपट दौड़ते नजर आते थे। बारिश के कहर ने उसकी देह उखाड़ कर रख दी।
नेता और अफसर रोजाना ही यहां से निकलते हैं, लेकिन सड़क के जख्मों को ठीक करवाने की किसी को फुरसत नहीं। नेता अपने बात अफसरों से कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। अफसरों का रवैया हमेशा की तरह ढीला ही रहता है।
नगर निगम ने सड़क का नवीनीकरण करीब दो साल पहले ही करवाया था। उस वक्त गांधी उद्यान और उसके आसपास की सड़कों का नवीनीकरण किया गया।
नियमानुसार किसी भी सड़क को बनने के बाद करीब चार साल चलना चाहिए, लेकिन यह सड़क दो साल में ही खराब हो गई। अब फिर गढ्डों के कारण सड़क को ठीक करने की जरूरत पड़ी है।
बारिश बीते काफी समय बीत चुका है। बावजूद इसके अब तक नगर निगम ने सड़कों की मरम्मत व नई सड़कों के निर्माण का काम शुरू नहीं किया है।
इस कारण संजय नगर तिराहा के पास, विकास भवन वाली सड़क, बसंत सिनेमा वाला मार्ग समेत अन्य कई सड़कों के हाल खराब हैं।
बड़े गढ्डों के कारण वाहनों को निकलने में दिक्कत हो रही है। हादसों की आशंका भी बनी रहती है।
शहर में साढ़े तीन करोड़ से नई सड़कों का निर्माण और पुरानी सड़कों को गढ्डा मुक्त किया जाना है। इसके लिए नगर निगम ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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अगले हफ्ते से निर्माण कार्य भी शुरू हो जाएंगे। उमेश गौतम, महापौर

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