मरीजों के परिजन रेमडेसिवर इंजेक्शन, ऑक्सीजन कन्संट्रेटर और रेग्यूलेटर की कालाबाजारी के हो रहे शिकार, परिजन आरोपियों से रहे सतर्क

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आर जे न्यूज़-

देश की राजधानी दिल्ली में गीता कॉलोनी थाना पुलिस ने ऑक्सीजन कन्संट्रेटर और रेग्यूलेटर की कालाबाजारी करने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान सलीम (30), जाहिद (25) अरविंद (35) और संतोष (30) के रूप में हुई है। इनसे 18 रेग्यूलेटर और एक ऑक्सीजन कन्संट्रेटर बरामद किया है।  मास्टर माइंड अपनी महिला सहयोगी के साथ फरार है। पुलिस उसकी तलाश में दिल्ली-एनसीआर में छापे मार कर रही है।

शाहदरा जिला पुलिस उपायुक्त आर. साथियासुंदरम ने बताया कि शनिवार को गीता कॉलोनी थाना पुलिस को खबर मिली थी कि दो लोग ऑक्सीजन फ्लोमीटर (रेग्यूलेटर) की कालाबाजारी कर रहे हैं। सूचना के बाद फौरन एक टीम का गठन किया। आरोपियों से नकली ग्राहक बनकर बातचीत की गई। आरोपियों ने 1080 रुपये के फ्लोमीटर के 7000 रुपये मांगे। सौदा होने पर आरोपी सलीम और जाहिद फ्लोमीटर लेकर गीता कॅालोनी पहुंचे तो उनको दबोच लिया गया।

इनसे 13 फ्लोमीटर बरामद किए गए। इन्होंने बताया कि वह अश्विनी दीक्षित नामक शख्स से 3500 रुपये का ऑक्सीजन फ्लोमीटर लेकर उसे सात हजार रुपये में बेचते हैं। पुलिस ने आरोपियों से जानकारी जुटाने के बाद अश्विनी से संपर्क किया। उससे एक ऑक्सीजन कन्संट्रेटर की बात 1.12 लाख में की गई।

सौदा होने पर कार सवार दो युवक अरविंद और संतोष कन्संट्रेटर लेकर पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। इनसे एक कन्संट्रेटर व पांच फ्लोमीटर बरामद हुए। पूछताछ बताया कि इस गोरखधंधे की मास्टरमाइंड अश्विनी और उसकी महिला सहयोगी तृप्ति बत्रा गाजियाबाद के मोबाइल नगर स्थित एक सोसायटी में हैं। सूचना के बाद पुलिस ने वहां दबिश दी, लेकिन उससे पहले ही दोनों फरार हो गए।

रेमडेसिवर इंजेक्शन की कालाबाजारी करने के आरोप में पश्चिम विहार वेस्ट थाना पुलिस ने दो पुरुष नर्स समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान अंशुल अग्रवाल, सुनील कुमार और राहुल पॉल के रूप में हुई है। आरोपी 32 हजार रुपये में एक इंजेक्शन बेचते थे।

सुनील व राहुल दोनों नर्स हैं, जबकि अंशुल एक कारोबारी का बेटा है। वह फोन पर हर एक डील करवाने के दो हजार रुपये लेता था। सुनील व राहुल अपने अस्पताल में कोविड से मरने वाले मरीजों के इंजेक्शन चोरी कर लेते थे। बाद में अंशुल के जरिये उनकी डील कराकर  मोटी रकम में बेच देते थे। पुलिस ने आरोपियों से छह इंजेक्शन बरामद किए हैं।

बाहरी जिला पुलिस उपायुक्त परविंदर सिंह ने बताया कि पश्चिम विहार वेस्ट थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ लोग रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी कर रहे हैं। पुलिस की टीम ने आरोपी का नंबर जुटाकर उससे नकली ग्राहक बनकर बातचीत की। फोन पर एक इंजेक्शन के बदले डील 32 हजार में हो गई। आरोपी को इंजेक्शन देने के लिए पश्चिम विहार बुलाया गया। वहां पुलिस ने ट्रैप लगाकर आरोपी को दबोच लिया।

उसकी पहचान अंशुल अग्रवाल के रूप में हुई। उसने बताया कि वह परिवार के साथ शाहदरा में रहता है। उसके पिता का गारमेंट का कारोबार है। वह पिता के साथ ही दुकान पर बैठता है। उसकी मुलाकात पिछले दिनों सुनील और राहुल से हुई थी। सुनील एनकेएस अस्पताल गुलाबी बाग में नर्स है। वहीं राहुल गायत्री अस्पताल, गाजियाबाद में नर्स है। दोनों मरीजों के इंजेक्शन चोरी करके लाते थे। इसके बाद अंशुल फोन पर लोगों से इंजेक्शन के लिए संपर्क करता था। बाद में डील तय होने के बाद सुनील और राहुल से इंजेक्शन लेकर उनको पहुंचा दिया जाता था। पुलिस ने अंशुल से पूछताछ के बाद सुनील और राहुल को भी गिरफ्तार कर लिया।

खजूरी खास मामले में नीरज कुमार तिवारी ने आठ मई को पीसीआर कॉल की थी। पीड़ित ने बताया कि उसे सोशल मीडिया से एक मोबाइल नंबर मिला। उस पर कॉल की तो सामने वाले ने पांच हजार रुपये का एक इंजेक्शन बताया। उसे छह इंजेक्शन की जरूरत थी तो आरोपी ने कुल राशि का 40 फीसदी एडवांस के रूप में गूगल पे के एक खाते में डालने की बात की। नीरज ने आठ हजार रुपये आरोपी के खाते में डाल दिए।

इसके बाद न तो इंजेक्शन भेजा और फोन भी उठाना बंद कर दिया। जांच के दौरान पुलिस ने खाते की जानकारी जुटाई तो वह रीवा, मध्य प्रदेश का मिला। पुलिस ने वहां पहुंचकर सोमवार को आरोपी अमन सिंह उर्फ लक्की (25) को गिरफ्तार कर लिया। उसके बैंक खाते से पुलिस ने 7.83 लाख से अधिक की रकम बरामद की। आरोपी ग्रेजुएट है और फिलहाल बिहार में एक निजी कंपनी में डाटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी कर रहा है।

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