सीबीआई के नए अंतरिम निदेशक मंदिर आंदोलन और आरएसएस नेताओं के हैं करीबी

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सीबीआई के नए अंतरिम निदेशक देश में हिंदू पुनर्जागरण काल के समर्थक हैं और उन संस्थाओं के साथ जुड़े हुए हैं, जो कि बीफ के निर्यात पर रोक की पक्षधर हैं और देश में सांस्कृतिक ताने-बाने को मजबूत करना चाहती हैं।
नागेश्वर राव प्रभावी थिंक टैंक माने जाने वाले द इंडिया फाउंडेशन और विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन से जुड़े कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेते रहते हैं। नागेश्वर राव के भाजपा नेता और आरएसएस प्रचारक राम माधव के भी करीबी बताए जाते हैं। नागेश्वर राव उन 7 अहम लोगों में शामिल थे,
जिन्होंने बीती 23 सितंबर को हिंदुओं की मांगों के लेकर तैयार किए गए एक चार्टर को तैयार करने में मदद की थी। श्रीजन फाउंडेशन के इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हेरीटेज कार्यक्रम में नागेश्वर राव ने भी शिरकत की थी।
सीबीआई में हुए हंगामे के बाद सरकार ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और स्पेशल निदेशक राकेश अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया है। इसके बाद संयुक्त निदेशक नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक नियुक्त किया गया है।
अब एक खबर में खुलासा हुआ है कि सीबीआई के नए अंतरिम निदेशक नागेश्वर राव का हिंदू सांस्कृतिक संस्थाओं से खासा जुड़ाव रहा है। इसके साथ ही वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ सदस्यों के भी करीबी माने जाते हैं।
इकॉनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, नागेश्वर राव हिंदू मंदिरों को राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र से बाहर करने की मांग करने वाली कई संस्थाओं के साथ जुड़े हुए हैं।
इसके साथ ही नागेश्वर राव उन कानूनों में बदलाव की की मांग के पैरोकार भी हैं, जिनमें अल्पसंख्यकों का पक्ष लिया गया है और ‘हिंदूओं के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया है!’
बता दें कि नागेश्वर राव हैदराबाद की ओस्मानिया यूनिवर्सिटी से केमिस्ट्री में परास्नातक हैं और वह काफी समय तक इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मद्रास में बतौर रिसर्चर काम भी कर चुके हैं।
जिस श्रीजन फाउंडेशन के कार्यक्रम में नागेश्वर राव ने शिरकत की वह संस्था जम्मू कश्मीर को 3 हिस्सों में बांटने और वहां से धारा 370 और 35ए हटाने के पक्ष में है। इसके साथ ही इस संस्था की यह भी मांग है कि विदेशी योगदान से संबंधित कानून फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन एक्ट को बदला जाए।
फाउंडेशन की वेबसाइट के अनुसार, इस संस्था का उद्देश्य भारतीय सभ्यता का पुनर्निर्माण और भारतीय इतिहास में लेफ्ट और मार्कसवादियों तैयार किए गए एंटी हिंदू और एंटी नेशनल नैरेटिव को खत्म करना है।
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सूत्रों के अनुसार, 23 सितंबर को हुई बैठक के बाद भी नागेश्वर राव ने संस्था से जुड़े लोगों के साथ करीब 2 घंटे तक चर्चा की थी।
हालांकि ऐसी खबरें हैं कि सरकारी पद पर होने के चलते नागेश्वर राव ने सक्रिय तौर पर चार्टर तैयार करने में कोई भूमिका नहीं निभायी, लेकिन उन्होंने इस दिशा में अपना सुझाव जरुर दिया।

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