एक ट्रक जिसे महाराष्ट्र से केरल तक का सफर तय करने में लगा 1 साल
- स्पेस सेंटर की मशीन के साथ यह वॉल्वो ट्रक पिछले साल 8 जुलाई को नाशिक से रवाना हुआ था।
- हर दिन इस ट्रक ने 5 किमी की दूरी तय की, रास्ते भर इसकी देखरेख के लिए 32 कर्मचारी मौजूद रहे।
– महाराष्ट्र से रवाना हुए एक ट्रक ने तिरूवनंतपुरम तक का सफर एक साल में पूरा किया। इस पर विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (वीएसएससी) के लिए स्पेस रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए 70 टन वजनी मशीनें लदी थीं। 74 पहियों वाला यह वॉल्वो ट्रक रविवार को तिरूवनंतपुरम पहुंचा। इसके साथ पहुंचे कार्गो कर्मचारी ने कहा, ‘‘हमने पिछले साल 8 जुलाई को नाशिक से सफर शुरू किया था। चार राज्यों से होते हुए केरल के तिरुवनंतपुरम के बीच 1700 किमी. की दूरी तय करने में हमें साल भर लग गए।’’ ट्रक की देखरेख के लिए 32 कर्मचारी रास्ते भर इसके साथ रहे। हर दिन इसने करीब 5 किलोमीटर की दूरी तय की। इसकी मदद से वीएएससी के लिए एयरोस्पेस होरीजोंटल ऑटोक्लेव को पहुंचाया गया। यह मशीन भारहीन सामान तैयार करने में मददगार होगी।
मशीन को जहाज से भेजना संभव नहीं था
मशीन की लंबाई 7.5 मीटर और चौड़ाई 6.65 मीटर है। इस वजह से इसे जहाज से भेजना संभव नहीं था। यही वजह रही कि इसे महाराष्ट्र से केरल तक सड़क के रास्ते पहुंचाने का फैसला किया गया था। भारी वजन लदे होने के कारण गाड़ी एक दिन में ज्यादा दूरी तय नहीं कर सकती थी। ऐसे में ट्रक पर मौजूद कर्मचारियों की टीम को इस बात का ध्यान रखना था कि इसकी वजह से कहीं भी ट्रैफिक जाम न हो।
मशीन को सुरक्षित रखने का ध्यान रखा गया
मशीन को रस्सियों से बांधकर ट्रक पर रखा गया था। इसे खींचने के लिए गाड़ी के आगे और पीछे दो एक्सल्स लगे थे। दोनों एक्सल्स में 32 पहिए लगे थे। एक्सल्स कुछ इस तरह लगाए गए थे कि मशीन का भार दोनों पर बंटा रहे और संतुलन बना रहे। इसके साथ ही 10 पहियों वाले एक पुलर को भी ट्रक से जोड़ गया था। पुलर ही मशीन लदे एक्सल्स को आगे खींच रहा था। मशीन को सुरक्षित रखने का भी भी ध्यान रखा गया।