शेयर बाजार में निवेश के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़, क्राइम ब्रांच ने 4 आरोपियों को दबोचा

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की इंटर स्टेट सेल ने राज्यों की सीमाओं के पार फैले एक बड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह व्हाट्सएप ग्रुप और ट्विटर के माध्यम से फर्जी स्टॉक ट्रेडिंग टिप्स देकर लोगों को अपनी ठगी का शिकार बनाता था। पुलिस ने इस मामले में जीरकपुर (पंजाब) निवासी रिशु गर्ग, जैतपुर (दिल्ली) निवासी अमित गिरी, मुंडका के दीपक जून उर्फ विकास और गुरुग्राम के सुनील कुमार यश को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही एक महिला आरोपी रेणु गर्ग को भी कानून के दायरे में शामिल किया गया है।

डीसीपी क्राइम आदित्य गौतम के निर्देशन और एसीपी रमेश कुमार लांबा के करीबी पर्यवेक्षण में इंस्पेक्टर शिवराज सिंह बिष्ट के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई थी। इस कार्रवाई की शुरुआत तब हुई जब एक पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई कि उसे शेयर बाजार में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर ₹45,25,100 की चपत लगाई गई है। जालसाजों ने पीड़ित को एक फर्जी ट्रेडिंग एप्लिकेशन इंस्टॉल करवाया और एक महीने के भीतर 15 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए आठ बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लिए। जब पीड़ित ने अपना पैसा निकालने की कोशिश की, तो ऐप ने काम करना बंद कर दिया और ठगों के सोशल मीडिया अकाउंट्स निष्क्रिय हो गए।

जांच के दौरान पुलिस ने जब मनी ट्रेल का पीछा किया, तो पता चला कि ठगी गई राशि को ठिकाने लगाने के लिए कई ‘म्यूल’ बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया था। छानबीन में सामने आया कि ठगी के ₹24 लाख पंजाब की रेणु गर्ग के खाते में क्रेडिट हुए थे। तकनीकी निगरानी के आधार पर पुलिस ने पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में ताबड़तोड़ छापेमारी की। पूछताछ में पता चला कि रेणु गर्ग का बेटा रिशु गर्ग उस खाते को संचालित करता था। रिशु ने खुलासा किया कि उसने मात्र ₹25,000 के बदले अपने खाते की नेट बैंकिंग क्रेडेंशियल्स विकास नामक व्यक्ति को दी थीं और बैंक ट्रांजेक्शन की लिमिट बढ़ाकर 21 करोड़ रुपये कर दी थी।

गिरोह के ‘मोडस ऑपरेंडी’ का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि ये लोग फर्जी व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर वहां निवेश के फर्जी प्रमाण पत्र और मुनाफे के स्क्रीनशॉट साझा करते थे ताकि लोगों का विश्वास जीता जा सके। इस सिंडिकेट का संचालन टेलीग्राम पर “मैक्स” नामक एक हैंडलर द्वारा किया जा रहा था, जो म्यूल अकाउंट्स और ओटीपी आधारित सेवाओं का समन्वय करता था। पकड़े गए आरोपी उच्च शिक्षित हैं; इनमें दीपक जून दिल्ली के पश्चिम विहार में पैथोलॉजी लैब चलाता है, जबकि सुनील कुमार बीएड पास है और रिशु गर्ग प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता है। पुलिस ने आरोपियों के पास से 4 मोबाइल फोन और 6 सिम कार्ड बरामद किए हैं। फिलहाल गिरोह के अन्य फरार सदस्यों की तलाश के लिए छापेमारी जारी है।

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