डिजिटल लत छोड़ मैदान की ओर लौटें युवा: एबीवीपी चलाएगी ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम’ अभियान

नई दिल्ली: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) दिल्ली का 61वां प्रदेश अधिवेशन केशव महाविद्यालय के ‘गुरु तेग बहादुर नगर’ में उत्साह और संकल्प के साथ संपन्न हुआ। दो दिवसीय इस महाकुंभ में दिल्ली के विभिन्न परिसरों से आए 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। अधिवेशन में न केवल छात्र राजनीति, बल्कि डिजिटल संतुलन, पर्यावरण और राष्ट्रविरोधी तत्वों के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ने के लिए चार प्रमुख प्रस्ताव पारित किए गए।

अधिवेशन की सबसे महत्वपूर्ण घोषणा युवाओं में बढ़ती मोबाइल और इंटरनेट की लत को लेकर रही। परिषद ने ‘स्क्रीन टाइम टू एक्टिविटी टाइम’ अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत छात्रों को डिजिटल उपकरणों के सीमित उपयोग और खेल-कूद व सांस्कृतिक गतिविधियों में अधिक समय बिताने के लिए प्रेरित किया जाएगा। परिषद का मानना है कि ‘जेन-जी’ (Gen-Z) को प्रकृति और संस्कृति से जोड़ना समय की मांग है।

राष्ट्रवाद की अलख जगाने के लिए 22 से 31 मार्च तक दिल्ली के सभी महाविद्यालयों में ‘वंदेमातरम’ की 150वीं वर्षगांठ धूमधाम से मनाई जाएगी। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर परिषद ‘मिशन साहसी’ अभियान के तहत छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देगी। रानी अबक्का की 500वीं जन्मजयंती के उपलक्ष्य में भी वर्षभर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा।

सत्र 2026-27 के लिए प्रो. तपन बिहारी को पुनः प्रदेश अध्यक्ष और सार्थक शर्मा को पुनः प्रदेश मंत्री चुना गया है। मंत्री प्रतिवेदन में सार्थक शर्मा ने बताया कि इस वर्ष परिषद ने दिल्ली में 54,000 से अधिक सदस्य बनाए हैं और 113 इकाइयों का गठन किया है।

उद्घाटन सत्र में पद्मश्री प्रो. चमू कृष्ण शास्त्री ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रेष्ठ समाज के निर्माण के लिए कार्यशक्ति, ज्ञानशक्ति और इच्छाशक्ति का होना अनिवार्य है। वहीं, अभाविप के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने संघ के ‘पंच परिवर्तन’ के विचार को कैंपस तक ले जाने और भारत के ‘स्व’ के भाव को जगाने का आह्वान किया।

अधिवेशन के दूसरे दिन रोहिणी क्षेत्र में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसका स्थानीय निवासियों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। इसके बाद रानीबाग के रामलीला मैदान में ‘खुला अधिवेशन’ आयोजित हुआ, जिसमें जेएनयू में राष्ट्रविरोधी नारों, डूसू चुनाव सुधार और दिल्ली विश्वविद्यालय की परीक्षा प्रणालियों में व्याप्त खामियों पर प्रहार किया गया।

पारित हुए चार मुख्य प्रस्ताव:

 * राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 का प्रभावी क्रियान्वयन।

 * डिजिटल लत से मुक्ति: खेल और संस्कृति की ओर वापसी।

 * राष्ट्रविरोधी तत्वों के विरुद्ध दिल्लीवासियों की एकजुटता।

 * सुरक्षित पर्यावरण: हर पीढ़ी का मूल अधिकार।

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