POCSO मामले में 18 दिन में चार्जशीट और 14 दिन में सजा, दोषी को 5 साल की जेल

नई दिल्ली: बाहरी दिल्ली के निहाल विहार थाना पुलिस ने महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराते हुए एक पॉक्सो मामले में रिकॉर्ड समय में सजा सुनिश्चित की है। पुलिस ने महज 18 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की, जिसके बाद माननीय न्यायालय ने मात्र 14 दिनों में ट्रायल पूरा करते हुए दोषी को 5 साल के सश्रम कारावास और 10,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। दोषी की पहचान धर्मेंद्र (25 वर्ष) के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार के मधुबनी का रहने वाला है और पिछले डेढ़ साल से निहाल विहार इलाके में सब्जी विक्रेता के रूप में काम कर रहा था। पुलिस ने 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के विश्लेषण के बाद उसे गिरफ्तार किया था।

बाहरी जिला के डीसीपी विक्रम सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना 3 अप्रैल की रात करीब नौ जे हुई थी, जब निहाल विहार इलाके में अपने घर के बाहर खेल रही 11 वर्षीय बच्ची के साथ आरोपी ने छेड़छाड़ की और मौके से फरार हो गया। पीड़िता के माता-पिता की मौजूदगी में दिए गए बयान के आधार पर थाना निहाल विहार में बीएनएस की धारा 74 और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसीपी राजबीर लांबा के पर्यवेक्षण और एसएचओ निहाल विहार इंस्पेक्टर शीशपाल के नेतृत्व में डब्लू/एसआई पूजा, हेड कांस्टेबल धर्मपाल, देवेंद्र ढाका, विक्रांत और कांस्टेबल विपिन की एक विशेष टीम गठित की गई।

जांच के दौरान टीम ने इलाके में लगे 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी विश्लेषण और स्थानीय खुफिया जानकारी के माध्यम से आरोपी धर्मेंद्र की पहचान सुनिश्चित की गई और उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों के रूप में पुख्ता सबूत जुटाए। पुलिस टीम की असाधारण पेशेवर दक्षता के चलते जांच को युद्ध स्तर पर पूरा किया गया और महज 18 दिनों के भीतर चार्जशीट अदालत में पेश कर दी गई।

अदालत में इस मामले की रोजाना सुनवाई हुई और पुलिस ने गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित की। सीसीटीवी फुटेज के ठोस साक्ष्यों और गवाहों के बयानों में एकरूपता को देखते हुए न्यायालय ने 8 मई को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने धर्मेंद्र को दोषी करार देते हुए 5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। दिल्ली पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई और पेशेवर जांच की सराहना की जा रही है, जिसने पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने और अपराधियों में कानून का डर पैदा करने की दिशा में एक बड़ी मिसाल कायम की है।

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