‘अल्गो ट्रेडिंग’ के नाम पर 100 करोड़ की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़, इंजीनियर समेत तीन गिरफ्तार

नई दिल्ली: मध्य दिल्ली के साइबर थाना पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है जो “अल्गो ट्रेडिंग” और शेयर बाजार में ऊंचे मुनाफे का झांसा देकर निर्दोष लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में कर्नाटक के बेंगलुरु और मध्य प्रदेश के सनावद में छापेमारी कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रवि राठौर (31), विकास राठौड़ (26) और सुदामा (29) के रूप में हुई है। इस गिरोह ने “Trademakeralgo” नामक एक फर्जी मोबाइल एप्लीकेशन और वेबसाइट के जरिए अब तक लगभग 636 लोगों से करीब 99.77 करोड़ रुपये की ठगी की है।

सेंट्रल जिला के डीसीपी रोहित राजवीर सिंह ने बताया कि पहाड़गंज निवासी एक व्यक्ति ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया कि उसे व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क कर स्टॉक मार्केट में बिना किसी नुकसान के गारंटीड मुनाफे का लालच दिया गया और “Trademakeralgo” ऐप डाउनलोड कराया गया। शुरुआत में पीड़ित ने 10,000 रुपये का निवेश किया, जिस पर उसे ऐप में फर्जी मुनाफा दिखाया गया। लेकिन जब उसने पैसे निकालने की कोशिश की, तो आरोपियों ने अलग-अलग बहानों से और पैसों की मांग शुरू कर दी। सतर्कता बरतते हुए पीड़ित ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत की, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

एसीपी ऑपरेशंस पद्म सिंह राणा के पर्यवेक्षण और साइबर थाना प्रभारी योगराज दलाल के नेतृत्व में दो विशेष टीमें गठित की गईं। तकनीकी विश्लेषण और आईपी एड्रेस ट्रैकिंग के माध्यम से पता चला कि इस फर्जीवाड़े का तकनीकी नियंत्रण बेंगलुरु से हो रहा था, जबकि कॉल सेंटर मध्य प्रदेश में चल रहा था। एसआई नवीन के नेतृत्व वाली पहली टीम ने बेंगलुरु से सॉफ्टवेयर इंजीनियर रवि राठौर को दबोचा, जो पहले कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में काम कर चुका था और वर्तमान में ‘श्नाइडर इलेक्ट्रिक’ में कार्यरत था। दूसरी टीम ने एसआई रविंदर के नेतृत्व में मध्य प्रदेश के सनावद से विकास और सुदामा को गिरफ्तार किया।

पुलिस जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरोपी रवि राठौर एक कंप्यूटर साइंस इंजीनियर है जो ऐप के विकास और रख-रखाव का काम देखता था। सुदामा ने इस पूरे सेटअप को फाइनेंस किया था और विकास कॉल सेंटर की गतिविधियों को संभालता था। ये लोग कॉल सेंटर में जानबूझकर महिला कॉलर्स को रखते थे ताकि पुरुष पीड़ितों को आसानी से प्रभावित किया जा सके। आरोपियों ने ठगी के पैसों से इंदौर में फ्लैट, लग्जरी स्कॉर्पियो-N कार खरीदी और स्थानीय क्रिकेट लीग में निवेश किया। पुलिस ने आरोपियों के पास से 4 सीपीयू, 3 लैपटॉप, 19 मोबाइल फोन, 13 सिम कार्ड, पीड़ितों का डेटा और कई बैंक दस्तावेज बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों और बैंक खातों की जांच कर रही है।

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