चीन से जुड़े हैं तार: टेलीग्राम और क्रिप्टो के जरिए चल रहा था करोड़ों की ठगी का खेल; क्राइम ब्रांच ने दो मुख्य आरोपी को दबोचा

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने संगठित साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बड़ी सफलता हासिल करते हुए दो अलग-अलग मामलों में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी निवेश के नाम पर लोगों से करीब 74 लाख रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का हिस्सा हैं। पुलिस ने इन ऑपरेशनों के जरिए उस पारिस्थितिकी तंत्र का पर्दाफाश किया है जिसमें ‘म्यूल अकाउंट’, विदेशी हैंडलर्स और क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कर कानून से बचने की कोशिश की जा रही थी।

27.82 लाख की ठगी का मास्टरमाइंड राहुल त्यागी गिरफ्तार

पश्चिमी जिला साइबर सेल ने एक पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई की जिसे व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए स्टॉक ट्रेडिंग, आईपीओ और ओटीसी ट्रेडिंग में निवेश का झांसा देकर 27,82,422 रुपये ठग लिए गए थे। एसीपी पाटिल स्वागत राजकुमार के नेतृत्व और इंस्पेक्टर विनय कुमार की टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ग्रेटर नोएडा की ‘पैरामाउंट गोल्फ फॉरेस्ट’ सोसायटी से राहुल त्यागी को गिरफ्तार किया।

पूछताछ में राहुल ने खुलासा किया कि वह टेलीग्राम के जरिए चीनी हैंडलर्स के संपर्क में था। उसने चीन स्थित ठगों के लिए 10-12 बैंक खाते और उनके सिम कार्ड उपलब्ध कराए थे, जिनका एक्सेस एपीके फाइल के जरिए विदेश से ही नियंत्रित किया जाता था। राहुल को इसका भुगतान पहले बाइनेंस के जरिए क्रिप्टोकरेंसी में और बाद में नकद मिलता था। वह इस रैकेट से अब तक 14-15 लाख रुपये कमा चुका है। इससे पहले उसे मुंबई पुलिस ने 2.5 करोड़ के डिजिटल अरेस्ट मामले में भी गिरफ्तार किया था।

47 लाख के निवेश फ्रॉड में म्यूल अकाउंट होल्डर रिंकू धरा गया

दूसरे मामले में दक्षिण-पूर्वी दिल्ली साइबर सेल ने ग्रेटर नोएडा के रोजा जलालपुर निवासी रिंकू (36 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। शिकायतकर्ता मोहम्मद वकार आजम से निवेश के नाम पर 47 लाख रुपये की ठगी की गई थी। जांच में पता चला कि रिंकू ने अपनी फर्म के नाम पर खुले बैंक खाते का सिम कार्ड सह-आरोपी सोनू को सौंप दिया था। रिंकू के खाते में ठगी के 31.45 लाख रुपये प्राप्त हुए थे, जिन्हें बाद में कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इस ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए रिंकू आगरा के एक होटल में दो दिनों तक रुका भी था।

डीसीपी क्राइम ब्रांच आदित्य गौतम ने बताया कि इन गिरोहों की कार्यप्रणाली बेहद जटिल है। ये लोग सोशल मीडिया पर फर्जी विज्ञापन देकर लोगों को व्हाट्सएप या टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ते हैं और फिर उन्हें लालच देकर ‘म्यूल अकाउंट्स’ में पैसा ट्रांसफर करवाते हैं।

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर प्रसारित होने वाले निवेश के अनचाहे प्रस्तावों से सावधान रहें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें। फिलहाल दोनों मामलों में आगे की जांच जारी है और सिंडिकेट के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।

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