सोशल मीडिया पर ‘महिला’ बनकर करते थे दोस्ती, फिर एयरपोर्ट पर फंसा बताकर लूटते थे लाखों, दो अफ्रीकी गिरफ्तार

नई दिल्ली: पूर्वी दिल्ली जिले के एंटी नारकोटिक्स स्क्वाड ने ‘ऑपरेशन साइबरहॉक-3.0’ के तहत एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए अफ्रीकी मूल के दो नागरिकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से 6 मोबाइल फोन और दो पासपोर्ट बरामद किए हैं। जांच में सामने आया है कि इन आरोपियों ने अब तक देशभर के 12 राज्यों में 50 लाख रुपये से अधिक की ठगी की है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की शिकायतों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने इनके फोन से एयरपोर्ट की फर्जी तस्वीरें, पीड़ितों के साथ की गई चैट और दर्जनों ‘म्यूल बैंक अकाउंट्स’ का विवरण बरामद किया है।

इमोशनल ब्लैकमेलिंग से ठगी का खेल

पकड़े गए आरोपियों की पहचान बेमाह (30 वर्ष, लाइबेरिया) और डियोफ सोलोमन (27 वर्ष, सेनेगल) के रूप में हुई है। ये आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर महिला बनकर भारतीय पुरुषों से दोस्ती करते थे। भावनात्मक संबंध बनाने के बाद ये दावा करते थे कि वे भारत आ रहे हैं। इसके बाद पीड़ितों को फोन कर बताया जाता था कि वे एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन या कस्टम क्लीयरेंस में फंस गए हैं। मदद के नाम पर ये पीड़ितों से विभिन्न बैंक खातों में लाखों रुपये जमा करा लेते थे। राजस्थान के सीकर निवासी एक पीड़ित से 4.24 लाख और बिहार के सारण निवासी युवक से 2.25 लाख रुपये इसी तरह ठगे गए थे।

म्यूल अकाउंट्स का फैलाया मायाजाल

पूर्वी दिल्ली के डीसीपी राजीव कुमार ने बताया कि इस सिंडिकेट ने ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए बैंक ऑफ इंडिया, जेएंडके ग्रामीण बैंक और इंडियन बैंक जैसे कई बैंकों में ‘रोहित कुमार’, ‘हर्ष पाल’ और ‘क्रांति’ जैसे नामों से फर्जी खाते खुलवा रखे थे। ऑपरेशन साइबरहॉक के तहत पुलिस ने जब इन खातों की गहन जांच की, तो पता चला कि इनका इस्तेमाल अरुणाचल प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, मुंबई और गुजरात के लोगों को ठगने के लिए किया गया था। अकेले मुंबई के एक पीड़ित से फिशिंग के जरिए 14.86 लाख रुपये उड़ाए गए थे।

नशे के कारोबार में भी थे शामिल

हैरानी की बात यह है कि पकड़े गए दोनों अफ्रीकी नागरिक न केवल साइबर ठगी बल्कि ड्रग्स तस्करी में भी लिप्त पाए गए हैं। ये वर्तमान में दिल्ली के अमृत पुरी, गढ़ी इलाके में रह रहे थे। पुलिस ने इनके मोबाइल से ऐसे कई चैट बरामद किए हैं जो ड्रग पेडलिंग की ओर इशारा करते हैं। इनके पासपोर्ट और वीजा की अवधि भी समाप्त हो चुकी थी। एसीपी पवन कुमार और इंस्पेक्टर अरुण कुमार के नेतृत्व वाली टीम अब इस संगठित गिरोह के अन्य सदस्यों और उन भारतीय सहयोगियों की तलाश कर रही है जो इन्हें बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऑनलाइन अनजान लोगों से दोस्ती करते समय बेहद सावधान रहें।

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