गूगल पर कस्टमर केयर नंबर ढूंढना पड़ा महंगा: रिफंड के बहाने स्क्रीन शेयर कराकर उड़ाए ₹1.25 लाख, साइबर सेल ने झांसी से दबोचे आरोपी

नई दिल्ली: दिल्ली के शाहदरा जिले के साइबर पुलिस स्टेशन ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म ‘ई-कार्ट’ के नाम पर फर्जी कस्टमर केयर बनकर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के झांसी से दो साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने एक पीड़ित से रिफंड दिलाने के नाम पर ₹1.25 लाख की धोखाधड़ी की थी। पकड़े गए आरोपियों की पहचान पंकज यादव और सत्यम यादव (19 वर्ष) के रूप में हुई है।

शाहदरा जिले के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि शिकायतकर्ता अरविंद ने एक इलेक्ट्रॉनिक शेवर खरीदा था, जो खराब निकला। जब उन्होंने गूगल पर ई-कार्ट का कस्टमर केयर नंबर सर्च किया, तो उन्हें एक फर्जी नंबर मिला। उस नंबर पर संपर्क करने पर जालसाजों ने खुद को कंपनी का एग्जीक्यूटिव बताया और रिफंड का भरोसा देकर व्हाट्सएप पर स्क्रीन शेयर करने और एक्सेसिबिलिटी परमिशन देने के लिए राजी कर लिया। जैसे ही पीड़ित ने परमिशन दी, उनका फोन ब्लैंक हो गया और उनके कोटक महिंद्रा व एसबीआई बैंक खातों से कुल ₹1.25 लाख निकल गए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी ऑपरेशंस मोहिंदर सिंह के मार्गदर्शन और साइबर थाना प्रभारी विजय कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम (इंस्पेक्टर श्वेता शर्मा, एएसआई राजदीप व अन्य) का गठन किया गया। टीम ने NCRP डेटा और मनी ट्रेल का गहन विश्लेषण किया, जिससे पता चला कि ठगी की राशि यूको बैंक और इंडियन बैंक के खातों में ट्रांसफर की गई है। तकनीकी सर्विलांस की मदद से पुलिस ने आरोपियों का पीछा झांसी तक किया और दोनों को धर दबोचा।

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे एक बड़े गिरोह का हिस्सा हैं। पंकज यादव अपने बैंक खाते ‘वंश’ नामक सहयोगी को कमीशन के बदले उपलब्ध कराता था। आरोपी गूगल सर्च रिजल्ट्स पर फर्जी कस्टमर केयर नंबर अपलोड करते थे। जब कोई पीड़ित रिफंड के लिए कॉल करता, तो वे रिमोट एक्सेस ऐप इंस्टॉल कराकर या स्क्रीन शेयरिंग के जरिए पीड़ित के बैंकिंग क्रेडेंशियल चुरा लेते और पैसे ट्रांसफर कर लेते थे। गिरोह के सदस्य झारखंड से कॉल करते थे, जबकि बैंक खातों का इंतजाम झांसी और आसपास के इलाकों से किया जाता था।

पुलिस ने आरोपियों के पास से दो मोबाइल फोन और दो सिम कार्ड बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस इस गिरोह के अन्य सदस्यों (वंश, कमल और गौरव) की तलाश में जुटी है। डीसीपी ने जनता से अपील की है कि गूगल पर मिलने वाले अनजान नंबरों पर भरोसा न करें और कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने फोन का स्क्रीन एक्सेस शेयर न करें।

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