शाहदरा साइबर पुलिस ने ‘जॉब फ्रॉड’ नेटवर्क का किया पर्दाफाश; गाजियाबाद से गिरफ्तार हुआ जालसाज, लिंक भेजकर उड़ाए थे ₹1.51 लाख

नई दिल्ली: दिल्ली के शाहदरा जिले के साइबर पुलिस स्टेशन ने नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले एक शातिर गिरोह के सदस्य को उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से गिरफ्तार किया है। आरोपी ने एक महिला से जॉब एप्लीकेशन के बहाने ₹1.51 लाख की धोखाधड़ी की थी। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद कर लिया है। पकड़े गए आरोपी की पहचान केशव कुमार कर्ण (28 वर्ष) के रूप में हुई है।

शाहदरा जिले के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि पूर्वी रोहताश नगर की रहने वाली नेहा चौधरी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्हें वर्क-फ्रॉम-होम जॉब का झांसा दिया गया। उन्हें रजिस्ट्रेशन के लिए एक लिंक भेजा गया, जिस पर क्लिक करते ही उनका मोबाइल फोन हैक हो गया। इसके तुरंत बाद उनके बैंक खाते से 8 अनधिकृत ट्रांजैक्शन हुए, जिससे उन्हें ₹1,51,018 का नुकसान हुआ। पीड़िता ने तुरंत एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई।

एसीपी ऑपरेशंस मोहिंदर सिंह के मार्गदर्शन और साइबर थाना प्रभारी विजय कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम (एसआई लवली शौकीन, हेड कांस्टेबल अक्षय व अन्य) का गठन किया गया। टीम ने बैंक खातों का विश्लेषण किया और पाया कि ठगी की रकम का एक हिस्सा गाजियाबाद के खोड़ा कॉलोनी स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक के एक खाते में गया है। तकनीकी जांच के बाद पुलिस ने आरोपी केशव कुमार कर्ण को ट्रैक किया और खोड़ा कॉलोनी में छापेमारी कर उसे दबोच लिया।

पूछताछ के दौरान आरोपी केशव ने चौंकाने वाला खुलासा किया। वह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के लिए कस्टमर सर्विस प्रोवाइडर के रूप में काम करता था। उसने अपने नाम पर इंडियन ओवरसीज बैंक में खाता खुलवाया था। आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने एक अज्ञात व्यक्ति को अपने खाते और सीएसपी सुविधा का इस्तेमाल करने दिया, जिसमें ठगी की रकम सहित कुल ₹1,30,000 जमा हुए थे। पैसे एटीएम से निकालने के बाद उसने सबूत मिटाने के लिए अपना एटीएम कार्ड तोड़कर फेंक दिया था।

जांच में सामने आया कि यह गिरोह व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए लोगों को घर बैठे नौकरी का लालच देता है। रजिस्ट्रेशन के नाम पर वे एक ‘मैलीशियस लिंक’ भेजते हैं, जिससे वे पीड़ित के फोन और बैंकिंग क्रेडेंशियल तक पहुंच हासिल कर लेते हैं। इसके बाद वे म्यूल अकाउंट्स का इस्तेमाल कर पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं। पुलिस अब इस गिरोह के मुख्य सरगना और अन्य साथियों की तलाश कर रही है।

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