पुलिस ने 800 किमी पीछा कर मध्य प्रदेश के शातिर ‘सिकलीगर’ चोर गिरोह का भंडाफोड़; चार चोर और सुनार समेत 5 गिरफ्तार, नकदी व जेवरात बरामद

नई दिल्ली: दिल्ली के उत्तर-पश्चिम जिले की थाना मुखर्जी नगर पुलिस टीम ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए मध्य प्रदेश के इंदौर आधारित पारंपरिक ‘सिकलीगर’ समुदाय से जुड़े एक बेहद शातिर अंतरराज्यीय चोरी और सेंधमारी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। दिल्ली पुलिस की विशेष टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए करीब 800 किलोमीटर दूर इंदौर तक आरोपियों का पीछा किया और तकनीकी व मानव खुफिया जानकारी के सहयोग से चार मुख्य चोरों सहित चोरी का सोना खरीदने वाले एक रिसीवर (सुनार) को भी गिरफ्तार कर लिया है।

गिरफ्तार मुख्य आरोपियों की पहचान मलखान सिंह (29), पूनम सिंह (44), प्रेम उर्फ प्रेमजीत (19), किरपाल (20) और आभूषण खरीदने वाले सुनार हमेंद्र पांडे (46) के रूप में हुई है। ये सभी आरोपी इंदौर, मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं। पुलिस ने इनके कब्जे और निशानदेही से ₹99,000 नगद, चोरी की एक मोटरसाइकिल, वारदात की रकम से खरीदी गई एक अन्य होंडा शाइन बाइक, एक आई-फोन, चांदी की पायल और सुनार के पास से भारी मात्रा में सोने के आभूषण (पेंडेंट, लॉकेट, बालियाँ और लॉकेट पंचाली) बरामद किए हैं। इस प्रभावी कार्रवाई से मुखर्जी नगर थाने में दर्ज सेंधमारी के एक बड़े मामले का सफल खुलासा हुआ है।

उत्तर-पश्चिम जिले की डीसीपी आकांक्षा यादव ने बताया कि 26 अप्रैल  को धीरपुर गांव में एक घर का ताला तोड़कर लगभग 30 तोला सोने के आभूषण, 500 ग्राम चांदी के जेवरात और ₹2.5 लाख नगद चोरी होने की एक बड़ी वारदात सामने आई थी। इस संबंध में थाना मुखर्जी नगर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 305/331(4)/3(5) के तहत एफआईआर दर्ज कर तफ्तीश शुरू की गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मॉडल टाउन सब-डिवाइजन के एसीपी सुरेश चंदर के निकट पर्यवेक्षण और मुखर्जी नगर के एसएचओ इंस्पेक्टर राजीव शाह के नेतृत्व में एक समर्पित विशेष टीम का गठन किया गया था। इस टीम में सब-इंस्पेक्टर अरुण कुमार, विजय, हेड कांस्टेबल विकास, वरुण आलोक, कंवर पाल, अंकित, देवेंद्र, सितेंद्र खोखर, बाबूलाल, वीरेंद्र, राकेश, चेतन, राजपाल, कांस्टेबल गोगाराम और विवेक शामिल थे।

जांच टीम ने घटनास्थल और उसके आसपास के रास्तों पर लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला। फुटेज के बारीक विश्लेषण और तकनीकी सर्विलांस से पुलिस को सुराग मिला कि वारदात में शामिल आरोपी पारंपरिक सिकलीगर समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले हैं। बिना समय गंवाए दिल्ली पुलिस की एक विशेष छापेमारी टीम को तुरंत इंदौर रवाना किया गया। टीम ने इंदौर के आकाश नगर और द्वारकापुरी इलाकों में जाल बिछाकर चारों मुख्य आरोपियों मलखान, पूनम, प्रेम और किरपाल को सफलतापूर्वक धर दबोचा।

गहन पूछताछ के दौरान आरोपियों ने धीरपुर गांव में की गई चोरी की बात कबूल की। उन्होंने बताया कि वे लोहे का काम करने और ताले की डुप्लीकेट चाबियाँ बनाने में माहिर हैं, जिसका फायदा उठाकर वे आसानी से बंद घरों के ताले तोड़ देते थे। गिरोह के सदस्य ट्रेन से दिल्ली आते थे और पहचान छुपाने के लिए महिपालपुर के होटलों में रुकते थे। दिल्ली में आवागमन को आसान बनाने और पुलिस की नजरों से बचने के लिए वे स्थानीय इलाकों से मोटरसाइकिल चोरी करते थे और उन्हीं बाइकों से रेकी करते थे। धीरपुर गांव में चोरी करने से पहले भी उन्होंने एक होंडा शाइन मोटरसाइकिल चोरी की थी।

आरोपियों ने खुलासा किया कि चोरी किए गए सोने के आभूषणों को उन्होंने इंदौर के एक सुनार हमेंद्र पांडे को ₹12 लाख में बेच दिया था और पैसों को आपस में बांट लिया था। चोरों के इस खुलासे पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुनार हमेंद्र पांडे को भी गिरफ्तार कर लिया, जिसने कबूल किया कि उसने आरोपियों से करीब 3 तोला चोरी का सोना खरीदकर ₹3 लाख दिए थे। पुलिस ने सुनार के पास से चोरी का सोना और चोरों की निशानदेही से चोरी की रकम से ऐश-ओ-आराम के लिए खरीदे गए आई-फोन व बाइक को बरामद कर लिया है। पुलिस अब इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के अन्य कड़ियों को खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह ने दिल्ली-एनसीआर में और कितनी चोरी की वारदातों को अंजाम दिया है।

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