‘ऑपरेशन कवच’ से थर्राई दिल्ली: 1042 पुलिस टीमों ने 3211 ठिकानों पर छापेमारी, पाताल से खोज निकाले अपराधी, सैकड़ों गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली को नशे के अभिशाप से मुक्त करने के लिए दिल्ली पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा और संगठित प्रहार किया है। ‘ऑपरेशन कवच-13.0’ के तहत राजधानी के सभी 15 जिलों में एक साथ ऐसी कार्रवाई की गई, जिसने संगठित अपराध की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू और पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा के सीधे निर्देशन में, क्राइम ब्रांच, स्पेशल सेल और जिला पुलिस की संयुक्त ताकत ने 48 घंटों (29 मार्च शाम 6 बजे से 31 मार्च शाम 6 बजे तक) के भीतर अपराधियों के किलों को ध्वस्त कर दिया।

पुलिस की इस रणनीति की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस ऑपरेशन के लिए कुल 1042 विशेष टीमें गठित की गई थीं। इन टीमों ने मानवीय खुफिया जानकारी और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर दिल्ली के 3211 संवेदनशील ठिकानों को चिन्हित किया और उन पर एक साथ धावा बोला। इस कार्रवाई में एनडीपीएस एक्ट के तहत 229 मामले दर्ज कर 267 नशा तस्करों को दबोचा गया। बरामदगी की सूची लंबी है, जिसमें 100 किलो गांजा, 1.170 किलो कोकीन, 260.65 ग्राम हेरोइन, और भारी मात्रा में एमडीएमए व एम्फ़ेटामाइन जैसे घातक सिंथेटिक ड्रग्स शामिल हैं।

इस अभियान के दौरान पुलिस ने न केवल स्थानीय पेडलर्स, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय अफ्रीकी मूल के तस्करों को भी गिरफ्तार किया है। महरौली में नाइजीरियाई नागरिक जॉन चिबुइके को 1031 ग्राम कोकीन के साथ पकड़ा गया, जबकि उत्तम नगर में एक अन्य विदेशी नागरिक कॉसमस को एम्फ़ेटामाइन के साथ गिरफ्तार किया गया। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने 5691 पुराने अपराधियों की उपस्थिति की जांच की और 59 घोषित अपराधियो को सलाखों के पीछे पहुँचाया। आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए 259 बदमाशों को 61 पिस्तौल और 191 चाकुओं के साथ पकड़ा गया, जिससे राजधानी में बड़ी वारदातों को टालने में मदद मिली।

ग्राउंड लेवल इनपुट से एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। ‘ऑपरेशन कवच’ के निरंतर प्रहारों के कारण बड़े ड्रग माफिया अब दिल्ली में सीधा माल लाने से बच रहे हैं। उन्होंने अब दिल्ली की सीमाओं के पास नोएडा और अन्य सटे इलाकों में अपने गुप्त गोदाम बना लिए हैं। गिरफ्तारी के डर से तस्कर अब भारी वाहनों के बजाय निजी कारों, छोटे मालवाहकों और ट्रेनों का सहारा ले रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पुलिस की नजरों से बचने के लिए अब तस्करों ने महिलाओं और बच्चों को ‘ढाल’ के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है, ताकि रास्ते में उन्हें एक सामान्य यात्रा करने वाला परिवार समझा जाए।

दिल्ली पुलिस का यह अभियान केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। विशेष सीपी (क्राइम) देवेश चंद्र श्रीवास्तव के अनुसार, इसका उद्देश्य युवाओं और बच्चों को नशे के दलदल से बचाना है। ऑपरेशन के दौरान 134 हॉटस्पॉट की पहचान की गई और 760 सार्वजनिक पार्कों व शौचालयों में ‘कार्डन एंड सर्च ऑपरेशन’ चलाया गया। पुलिस ने समाज के सभी वर्गों, विशेषकर अभिभावकों और शिक्षकों से अपील की है कि वे ‘नशा मुक्त भारत’ अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएं। अपराधियों के विरुद्ध यह ‘रुथलेस’ अभियान आने वाले समय में और अधिक तीव्रता के साथ जारी रहेगा ताकि दिल्ली की सड़कों को अपराध और नशे से सुरक्षित बनाया जा सके।

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