शकरपुर पुलिस ने ‘फेक रिकवरी एजेंट’ गिरोह का किया भंडाफोड़, ऐप के जरिए ईएमआई डिफॉल्टरों को ढूंढकर करते थे लूटपाट

नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्वी जिले की शकरपुर थाना पुलिस ने तकनीक का सहारा लेकर सड़क पर लूटपाट और जबरन वसूली करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने बैंक रिकवरी एजेंट बनकर लोगों को डराने और उनसे पैसे ऐंठने वाले चार आरोपियों प्रिंस (22 वर्ष), आकाश उर्फ अक्कू (25 वर्ष), शिवम (23 वर्ष) और टीटू (22 वर्ष) को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से वारदात में इस्तेमाल एक सफेद ब्रेजा कार और पांच मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। यह गिरोह एक मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए उन वाहनों को चिन्हित करता था जिनकी ईएमआई लंबित होती थी।

पूर्वी जिले के डीसीपी राजीव कुमार ने बताया कि 26 मार्च को शिकायतकर्ता केशव कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि विकास मार्ग पर आईटीओ के पास एक सफेद ब्रेजा कार सवार युवकों ने उनका रास्ता रोका। आरोपियों ने खुद को बैंक का रिकवरी एजेंट बताया और पीड़ित के साथ मारपीट कर उन्हें जबरन अपनी कार में बिठा लिया। डरा-धमकाकर आरोपियों ने उनसे ₹18,000 ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए और फिर उन्हें छोड़ दिया। इस संबंध में थाना शकरपुर में बीएनएस की धारा 140(3)/308(5)/3(5) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना प्रभारी इंस्पेक्टर विजेंद्र नागर के नेतृत्व में एसआई अनुभव, विशाल और उनकी टीम गठित की गई। तकनीकी निगरानी और स्थानीय मुखबिरों की मदद से पुलिस को उत्तर प्रदेश के बागपत के रहने वाले कुछ युवकों की संलिप्तता का पता चला। पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर छापेमारी कर चारों आरोपियों को धर दबोचा। पूछताछ में खुलासा हुआ कि ये लोग ‘ईजी रिकवरी ऐप’ का इस्तेमाल कर उन गाड़ियों का डेटा निकालते थे जिनकी किस्तें बकाया थीं, ताकि शिकार को यह यकीन हो जाए कि वे असली बैंक एजेंट हैं।

आरोपियों का प्रोफाइल खंगालने पर पता चला कि प्रिंस, शिवम और टीटू बागपत के रहने वाले हैं, जबकि आकाश लोनी (गाजियाबाद) का निवासी है। इन सभी की उम्र 22 से 25 वर्ष के बीच है और इनका पहले का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। ये लोग बिना नंबर प्लेट वाली ब्रेजा कार का इस्तेमाल करते थे ताकि पकड़े न जाएं। गिरोह का मॉडस ऑपरेंडी काफी व्यवस्थित था; वे भीड़भाड़ वाली सड़कों पर पीड़ितों को रोकते, मारपीट कर उन्हें बंधक बनाते और क्यूआर कोड या ऑनलाइन माध्यम से पैसे वसूलते थे। पुलिस अब इनके अन्य साथियों और उन लोगों की तलाश कर रही है जो इन वित्तीय लेन-देन में इनकी मदद करते थे। फिलहाल चारों आरोपी पुलिस की हिरासत में हैं।

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