सिर्फ खाना पकाना ही नहीं, इन 10 कामों के लिए भी जरूरी है LPG; सप्लाई रुकी तो मचेगा हाहाकार

नई दिल्ली: मार्च 2026 में भारत एक ऐसे ऊर्जा संकट के मुहाने पर खड़ा है, जिसने देश की अर्थव्यवस्था के उन हिस्सों को हिला दिया है जिन्हें हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. आम भारतीय घरों में LPG का मतलब सिर्फ ‘रसोई गैस’ है, लेकिन असलियत यह है कि यह गैस हमारे आधुनिक जीवन और औद्योगिक विकास की ‘अदृश्य रीढ़’ है. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और समुद्री रास्तों की नाकेबंदी के कारण उपजे ताजा संकट ने यह साफ कर दिया है कि अगर LPG की सप्लाई रुकी, तो सिर्फ चूल्हा ही नहीं बुझेगा, बल्कि देश का चक्का जाम हो जाएगा.

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में LPG का एक बड़ा हिस्सा घरेलू काम में आता है, लेकिन इसका दूसरा हिस्सा भारी उद्योगों, तकनीक, खेती और परिवहन को रफ्तार देता है. आइए जानते हैं वे 10 महत्वपूर्ण काम जहाँ LPG के बिना काम रुक सकता है

1. आधुनिक खेती और रसायनों से मुक्ति
LPG का एक क्रांतिकारी उपयोग कृषि में है. किसान रसायनों के बिना खरपतवार नष्ट करने के लिए ‘LPG फ्लेम वीडर्स’ का उपयोग करते हैं. गैस की किल्लत का मतलब है कि किसानों को फिर से हानिकारक रसायनों पर निर्भर होना पड़ेगा या उनकी फसल खराब हो जाएगी.

2. कपड़े की फिनिशिंग
टेक्सटाइल इंडस्ट्री में सूती कपड़ों से छोटे-छोटे रेशों को जलाने और कपड़े को रेशमी अहसास देने के लिए LPG की सटीक लौ का उपयोग होता है. अगर सप्लाई रुकी, तो कपड़ों की गुणवत्ता और निर्यात दोनों प्रभावित होंगे.

3. डियोड्रेंट और एरोसोल स्प्रे
क्या आप जानते हैं कि आपके परफ्यूम, डियोड्रेंट, हेयर स्प्रे और यहां तक कि रूम फ्रेशनर की कैन के अंदर दबाव बनाए रखने के लिए LPG (Propellant) का उपयोग होता है? इसके बिना ये स्प्रे बोतलें काम नहीं करेंगी.

4. सोने-चांदी के गहनों का निर्माण
ज्वेलरी मेकिंग में धातुओं को जोड़ने और उन्हें पिघलाने के लिए बहुत ही बारीक और तेज आंच की जरूरत होती है. यह सटीकता केवल LPG से ही संभव है. सराफा बाजार में इस संकट का सीधा असर देखा जा रहा है.

5. कंप्यूटर चिप्स और हाई-टेक उद्योग

सेमीकंडक्टर और कंप्यूटर चिप्स बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘सिलिकॉन वेफर्स’ के निर्माण में उच्च शुद्धता वाली LPG का उपयोग होता है. तकनीक की दुनिया में LPG के बिना संकट खड़ा हो सकता है
. खाद्य सुरक्षा: अनाज और फल सुखाना
फसल कटाई के बाद अनाज, मसालों और फलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उन्हें औद्योगिक ड्राइर्स में सुखाया जाता है, जो LPG पर चलते हैं. सप्लाई में देरी यानी अनाज के सड़ने का खतरा और बढ़ती महंगाई.

7. कांच और सिरेमिक (टाइल्स) उद्योग
मोरबी (गुजरात) जैसे सिरेमिक हब में टाइल्स और कांच के बर्तनों को पकाने के लिए विशाल भट्टियों में LPG जलती है. यहाँ गैस की कमी का मतलब है हजारों करोड़ का नुकसान और निर्माण कार्य में देरी.

8. अस्पतालों में बैकअप पावर
कई बड़े अस्पतालों और डेटा सेंटरों में बिजली जाने पर छोटे LPG जनरेटर का उपयोग किया जाता है क्योंकि ये डीजल की तुलना में कम प्रदूषण फैलाते हैं और तुरंत शुरू हो जाते हैं. इमरजेंसी सेवाओं के लिए यह गैस जीवनरक्षक है.

9. सड़क निर्माण
सड़कों पर बिछाने वाले डामर को गरम करने के लिए LPG हीटर्स का उपयोग होता है. हाईवे प्रोजेक्ट्स की रफ्तार इस समय गैस की कमी के कारण धीमी पड़ रही है.

10. परिवहन और लॉजिस्टिक्स
लाखों ऑटो-रिक्शा, टैक्सियाँ और गोदामों में चलने वाली फोर्कलिफ्ट मशीनें LPG पर निर्भर हैं. गैस स्टेशनों पर लगी लंबी कतारें बताती हैं कि शहर की रसद व्यवस्था और आम आदमी की यात्रा कितनी प्रभावित हो रही है.

एलपीजी संकट का प्रभाव

होटल और खान-पान: संचालन लागत बढ़ने से खाने की कीमतें बढ़ेंगी और कमर्शियल सिलेंडरों की कालाबाजारी की संभावना भी काफी बढ़ जाएगी.
प्लास्टिक उद्योग: एलपीजी की कमी से उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे प्लास्टिक बोतलें, पैकेजिंग सामग्री और खाद्य कंटेनरों के दाम काफी बढ़ सकते हैं.
रोजगार संकट: छोटे भोजनालय और कैंटीन बंद होने से कामगारों के सामने आजीविका और रोजगार का गंभीर संकट पैदा हो सकता है.
भारी उद्योग: धातु गलाने और कांच निर्माण जैसी उच्च तापमान प्रक्रियाएं रुकने से उत्पादन ठप होगा और शीशियों की आपूर्ति प्रभावित होगी.
सड़क निर्माण: डामर मशीनों को गर्म करने के लिए गैस न मिलने से सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों में भारी देरी होगी.
परिवहन क्षेत्र: गैस स्टेशनों पर लंबी कतारों से टैक्सी और डिलीवरी सेवाएं महंगी होंगी, जिससे आम जनता की जेब पर बोझ बढ़ेगा.
कृषि क्षेत्र: फसल सुखाने की प्रक्रिया रुकने से अनाज खराब होने का डर है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा.
बिजली और सेवाएं: दूरदराज क्षेत्रों में गैस आधारित बिजली उत्पादन रुकने से स्वास्थ्य, संचार और बुनियादी नागरिक सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी.
एलपीजी को अक्सर केवल रसोई गैस के रूप में देखा जाता है, लेकिन वास्तव में यह आधुनिक जीवन और अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों की आधारशिला है. होटल, उद्योग, कृषि, परिवहन और ऊर्जा उत्पादन जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र इस पर निर्भर हैं. ऐसे में एलपीजी की आपूर्ति में कमी का प्रभाव केवल घरों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी अर्थव्यस्था पर व्यापक असर डाल सकता है. इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एलपीजी की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना समय की जरूरत है.

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