निवेश और टास्क के नाम पर करोड़ों लूटने वाले सिंडिकेट का भंडाफोड़, दिल्ली पुलिस की 11 राज्यों में छापेमारी, 27 ठग गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस के पश्चिम जिला स्थित साइबर थाना ने एक सप्ताह तक चले अखिल भारतीय अभियान के दौरान संगठित साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए 27 कट्टर साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर, पंजाब, दिल्ली, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 11 राज्यों में एक साथ की गई। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 25 मोबाइल फोन, 28 सिम कार्ड, 20 बैंकिंग कार्ड, एक पीओएस मशीन, एक मोटरसाइकिल और भारी मात्रा में बैंक दस्तावेज बरामद किए हैं। गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य रूप से सुखप्रीत सिंह (38), रमाशंकर राय (42), दीपक (22), वंश वालिया (20), चनप्रीत सिंह (38), अभिषेक (21), किशन मोतीराम (28), श्याम साहनी (21), विशाल (20), अभय पाल (20), शुभम (30), निर्मल ढांका (25), शेखर (25), अनुज कुमार (22), तनवीर अहमद शेख (21), मो. राशिद अंसारी (36), मकसूद हसन (40), मोहम्मद कासिम (22), फैसल (28), अंग्रेज सिंह (29), आकाश सेठ (26), सुहैल चौधरी (20), अर्जुन सुथार (28), राहुल पाटीदार (23), सचिन गुप्ता (41), सौरव पांचाल (26) और सौरव श्रीवास्तव (26) शामिल हैं। जांच में इनके खातों में करीब ₹13.91 करोड़ का संदिग्ध वित्तीय लेनदेन पाया गया है और इनके खिलाफ देशभर में 150 से अधिक NCRP शिकायतें दर्ज हैं।

पश्चिम जिले के डीसीपी दराडे शरद भास्कर के मार्गदर्शन और एसीपी ऑपरेशंस विजय सिंह के पर्यवेक्षण में गठित एक विशेष टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। ‘साइबर थाना’ प्रभारी इंस्पेक्टर विकास कुमार बुलडक के नेतृत्व में पुलिस की कई टीमों ने एक सप्ताह तक चले इस ‘पैन-इंडिया’ सर्च ऑपरेशन के दौरान संदिग्धों का पीछा किया। छापेमारी के दौरान पुलिस ने तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी का इस्तेमाल करते हुए विभिन्न राज्यों से इन अपराधियों को दबोचा। यह गिरोह निवेश धोखाधड़ी, एपीके फाइल फ्रॉड और सोशल मीडिया पर लोगों की पहचान चोरी कर ठगी करने जैसे अपराधों में शामिल था।

पुलिस के अनुसार, यह सिंडिकेट मुख्य रूप से छह तरह की ठगी को अंजाम देता था: निवेश के नाम पर झांसा देना, बैंकिंग अधिकारियों के रूप में पेश होकर एपीके फाइल भेजना, व्हाट्सएप/इंस्टाग्राम पर परिचित बनकर पैसे मांगना, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड, टास्क-बेस्ड जॉब का लालच देना और वीजा दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी। आरोपियों के बैंक खातों के विश्लेषण से पता चला कि वे ठगी गई राशि को तुरंत कई लेयर्स में ट्रांसफर कर देते थे, ताकि पुलिस की पकड़ से बचा जा सके। इनके पास से बरामद सिम कार्ड और बैंक किट का इस्तेमाल फर्जी खातों को संचालित करने के लिए किया जा रहा था।

इस बड़ी कार्रवाई के जरिए दिल्ली पुलिस ने 10 प्रमुख साइबर मामलों का खुलासा किया है। इनमें ₹15 लाख की वीजा आधारित धोखाधड़ी, ₹4.67 लाख की टास्क-बेस्ड ठगी और निवेश के नाम पर ₹33.26 लाख व ₹19.5 लाख जैसी बड़ी रकम की ठगी शामिल है। पुलिस ने पाया कि आरोपियों ने आम लोगों से करीब ₹1.5 करोड़ की सीधी ठगी की थी, जबकि उनके खातों में करोड़ों रुपयों का संदिग्ध लेनदेन इस अपराध की व्यापकता को दर्शाता है।

डीसीपी दराडे शरद भास्कर ने बताया कि यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के लिए एक कड़ा संदेश है कि वे देश के किसी भी कोने में छिप जाएं, पुलिस उन्हें ढूंढ निकालेगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक, एपीके फाइल या लुभावने निवेश प्रस्तावों पर विश्वास न करें। फिलहाल सभी 27 आरोपियों से विस्तृत पूछताछ जारी है ताकि इस सिंडिकेट के पीछे छिपे अन्य ‘हैंडलर्स’ और मास्टरमाइंड का पता लगाया जा सके। पुलिस अब इनके नेटवर्क के तकनीकी पहलुओं और अंतरराष्ट्रीय लिंक की भी जांच कर रही है।

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