नबी करीम स्टेशन का नाम ‘रामनगर’ करने की उठी मांग, विहिप ने मेट्रो प्रबंधन को लिखा पत्र

नई दिल्ली: दिल्ली मेट्रो के फेज-4 के अंतर्गत इंद्रप्रस्थ-इंद्रलोक कॉरिडोर पर प्रस्तावित स्टेशन के नामकरण को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। इंद्रप्रस्थ विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने प्रस्तावित “नबी करीम” मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर ऐतिहासिक पहचान के अनुरूप “रामनगर” करने की मांग की है। इस संबंध में विहिप के प्रांत मंत्री सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।

विहिप के प्रांत मंत्री ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि जिस क्षेत्र में यह स्टेशन प्रस्तावित है, वह दशकों से राजस्व अभिलेखों, नगर निगम के दस्तावेजों और स्थानीय पते में “रामनगर” के नाम से दर्ज है। उन्होंने कहा कि मेट्रो स्टेशन का नामकरण स्थानीय इतिहास और जनस्वीकृति के आधार पर होना चाहिए। स्थापित ऐतिहासिक पहचान की अनदेखी करना न केवल जनभावनाओं के प्रतिकूल है, बल्कि इससे यात्रियों के बीच भौगोलिक भ्रम की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।

अपने पत्र में सुरेन्द्र कुमार गुप्ता ने हाल ही में “सुप्रीम कोर्ट” मेट्रो स्टेशन के नाम परिवर्तन में हुए लगभग 45 लाख रुपये के संभावित व्यय का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि यदि प्रारंभिक स्तर पर ही स्थानीय पहचान का सम्मान कर सही नाम रखा जाए, तो भविष्य में नाम बदलने की प्रक्रिया में होने वाली सार्वजनिक धन की अनावश्यक हानि से बचा जा सकता है। विहिप ने सुझाव दिया है कि नामकरण समिति में स्थानीय प्रतिनिधियों और इतिहासकारों को भी सम्मिलित किया जाना चाहिए।

विश्व हिंदू परिषद का मानना है कि दिल्ली मेट्रो केवल एक यातायात माध्यम नहीं, बल्कि राजधानी की सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक है। संगठन ने डीएमआरसी से आग्रह किया है कि भविष्य में किसी भी स्टेशन के नाम निर्धारण से पहले सार्वजनिक सुझावों की एक पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जाए। विहिप ने स्पष्ट किया है कि मेट्रो की विकास यात्रा को स्थानीय इतिहास के सम्मान के साथ ही आगे बढ़ना चाहिए।

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