सेंटर फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट ने रैन बसेरों के लिए DUSIB को सौंपीं 10 व्हीलचेयर, दिव्यांगों की राह होगी आसान

नई दिल्ली: दिल्ली के रैन बसेरों में रहने वाले दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए एक राहत भरी खबर है। दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में, ‘सेंटर फॉर हॉलिस्टिक डेवलपमेंट –सीएचडी‘ ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) को औपचारिक रूप से 10 व्हीलचेयर दान की हैं। यह कदम रैन बसेरों में रह रहे गतिशीलता की समस्या झेल रहे व्यक्तियों को बेहतर मानवीय जीवन स्थितियां प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

इस मानवीय पहल की नींव नीति 24 जनवरी को साकेत जिला न्यायालय परिसर में आयोजित एक कार्यवाही के दौरान पड़ी थी। कार्यवाही के दौरान अधिवक्ता शम्भावी सिंह ने सुझाव दिया था कि डीयूएसआईबी के माध्यम से रैन बसेरों में व्हीलचेयर उपलब्ध कराई जानी चाहिए। इस सुझाव पर सीएचडी के कार्यकारी निदेशक सुनील कुमार आलेडिया ने तुरंत स्वेच्छा से 10 व्हीलचेयर देने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए सीएचडी की इस तत्परता को रिकॉर्ड पर लिया और डीयूएसआईबी को निर्देश दिया कि वे इन व्हीलचेयरों को स्वीकार कर उचित उपयोग में लाएं। न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी अतिरिक्त आवश्यकता की व्यवस्था डीयूएसआईबी द्वारा की जाएगी।

न्यायालय के इसी आदेश और ‘प्रोजेक्ट ओपन आर्म्स’ के तहत 6 फरवरी को व्हीलचेयर का औपचारिक हस्तांतरण संपन्न हुआ। सीएचडी के कार्यकारी निदेशक सुनील कुमार ने इस अवसर पर कहा कि “सुगम्यत कोई दान नहीं बल्कि एक मौलिक अधिकार है।” संगठन ने न्यायालय के निर्देशों को धरातल पर उतारने के लिए सार्वजनिक प्राधिकरणों के साथ सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। इन व्हीलचेयरों के आने से रैन बसेरों में रह रहे बेघर और लाचार लोगों की गरिमापूर्ण जीवन की पहुंच सुदृढ़ होगी।

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