स्टॉक मार्केट में निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी के सिंडिकेट का स्पेशल सेल ने किया भंडाफोड़, छह गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की IFSO (इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस) यूनिट ने शेयर बाजार में भारी मुनाफे का लालच देकर करोड़ों की ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मुंबई, कोटा, नोएडा और लखनऊ में ताबड़तोड़ छापेमारी कर गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह विदेशों में बैठे मास्टरमाइंड के इशारे पर भारत में ‘म्यूल बैंक अकाउंट्स’ का जाल बिछाकर ठगी को अंजाम दे रहा था।

IFSO के डीसीपी विनीत कुमार ने बताया कि रियल एस्टेट डेवलपर कृष्ण कुमार ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनसे ऑनलाइन स्टॉक मार्केट में निवेश के नाम पर करीब 3.76 करोड़ रुपये की ठगी की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसीपी मनोज कुमार के मार्गदर्शन और एसआई सुनील कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई।

मुंबई से कोटा तक पीछा कर दबोचा पहला आरोपी

जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि ठगी की रकम का एक हिस्सा मुंबई निवासी सिबलू कुमार के खाते में गया था। पुलिस टीम ने मुंबई में दबिश दी, लेकिन आरोपी वहां से फरार हो गया। तकनीकी सर्विलांस की मदद से उसे राजस्थान के कोटा से दबोचा गया। सिबलू से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने दिल्ली के जंगपुरा में एक घर पर छापा मारा, जहां से वसीम अहमद, राजेश खान, शाहिद अली और मन्नू इस्सर को गिरफ्तार किया गया। बाद में इस सिंडिकेट के एक और अहम सदस्य मनीष कुमार को द्वारका से पकड़ा गया।

पूर्व सुरक्षा अधिकारी और व्यापारी भी शामिल

पकड़े गए आरोपियों का प्रोफाइल चौंकाने वाला है। आरोपी राजेश खान पूर्व में असम राइफल्स और एविएशन सिक्योरिटी ऑफिसर के रूप में काम कर चुका है। मन्नू इस्सर पुरानी कारों का कारोबार करता है और उस पर पहले से ही कर्नाटक, गुजरात व हरियाणा में सायबर ठगी के केस दर्ज हैं। वहीं, मनीष कुमार के व्हाट्सएप चैट से पता चला है कि उसके द्वारा मैनेज किए जा रहे बैंक खातों के खिलाफ देशभर में 52 शिकायतें दर्ज हैं।

विदेशी आकाओं के लिए करते थे काम

पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गिरोह विदेशी ठगों को भारतीय बैंक खाते और सिम कार्ड उपलब्ध कराता था। ये लोग पीड़ितों के फोन में फर्जी APK फाइलें इंस्टॉल करवाकर उनके खातों का एक्सेस हासिल कर लेते थे। पुलिस ने इनके पास से 9 मोबाइल फोन बरामद किए हैं जिनमें ठगी के पुख्ता डिजिटल सबूत मिले हैं। पुलिस अब इस सिंडिकेट के अन्य सदस्यों और मनी ट्रेल (पैसों के लेनदेन) की जांच कर रही है।

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