डीयू के मैत्रेयी कॉलेज में ब्राह्मी लिपि पर तीन दिवसीय कार्यशाला संपन्न, युवा शोधार्थियों को मिला प्राचीन लिपि का व्यावहारिक ज्ञान

नई दिल्ली: प्राचीन भारतीय सभ्यता की जननी मानी जाने वाली ब्राह्मी लिपि के अध्ययन, पठन, लेखन और लिप्यंतरण को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के मैत्रेयी कॉलेज में तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इतिहास विभाग (इस्तोरिया) द्वारा तत्त्वम् फाउंडेशन फॉर पॉलिसी एंड रिसर्च के सहयोग से 12 से 15 जनवरी तक चली इस कार्यशाला में युवा शोधार्थियों और छात्रों ने गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया।

कार्यशाला का उद्घाटन 12 जनवरी को हुआ, जिसमें भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की ज्ञान भारतम् परियोजना के परियोजना निदेशक प्रो. अनिरबान दास मुख्य अतिथि रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. ओम नाथ बिमली विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समापन सत्र 15 जनवरी को संपन्न हुआ, जिसमें हिमालयन बौद्ध सांस्कृतिक संघ के अध्यक्ष गेशे लोबसांग छोशल ज़ोतपा मुख्य अतिथि और दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्वी एशियाई अध्ययन विभाग की अध्यक्ष प्रो. रंजना मुखोपाध्याय विशिष्ट अतिथि रहीं।

मैत्रेयी कॉलेज की प्राचार्या प्रो. हरितमा चोपड़ा और उप-प्राचार्या डॉ. ज्योति सिंह के संरक्षण में आयोजित इस कार्यक्रम में ब्राह्मी लिपि के व्यावहारिक पहलुओं पर विशेष जोर दिया गया। तत्त्वम् फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. गणेश तिवारी और मैत्रेयी कॉलेज की डॉ. प्रियंका निरूपम ने समन्वय का कार्य संभाला।

कार्यशाला में अभिलेखशास्त्र, पांडुलिपि-विज्ञान और ऐतिहासिक अनुसंधान से जुड़े युवा प्रतिभागियों की अकादमिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। यह प्रयास भारत की प्राचीन पांडुलिपि विरासत और ज्ञान परंपराओं को संरक्षित करने तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ब्राह्मी लिपि, जो अधिकांश भारतीय लिपियों की जननी है, के माध्यम से प्राचीन शिलालेखों और अभिलेखों को पढ़ने-समझने की क्षमता विकसित करने पर बल दिया गया।

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