AIIMS में मरीजों के तीमारदारों के लिए बनेगा 3000 बेड का ‘विश्राम सदन’, हाईकोर्ट ने प्रयासों को सराहा

रैन बसेरों की कमियों पर साकेत कोर्ट में 24 जनवरी को होगी अहम बैठक

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे नहीं सोना पड़ेगा। दिल्ली हाईकोर्ट ने एम्स (AIIMS) परिसर में 3000 बेड का विशाल ‘विश्राम सदन’ बनाने के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने इस दिशा में एम्स प्रशासन द्वारा दिखाए गए उत्साह और प्रयासों की विशेष रूप से प्रशंसा की है।

अंसारी नगर में 2 एकड़ जमीन पर होगा निर्माण

अदालत में पेश की गई स्टेटस रिपोर्ट के अनुसार, एम्स प्रशासन अंसारी नगर (पश्चिम परिसर) में लगभग 2 एकड़ भूमि पर इस विश्राम सदन का निर्माण करने जा रहा हैं। यह परियोजना अहमदाबाद के एक गैर-सरकारी संगठन ‘सेवादान आरोग्य फाउंडेशन’ के सहयोग से विकसित की जाएगी। पीठ ने उम्मीद जताई कि यह सुविधा न्यूनतम संभव समय में बनकर तैयार हो जाएगी ताकि मरीजों के बेघर परिजनों को बड़ी राहत मिल सके।

रैन बसेरों की कमियों पर जताई चिंता

सुनवाई के दौरान न्याय मित्र और अन्य वकीलों ने रैन बसेरों की वर्तमान स्थिति पर भी सवाल उठाए। कोर्ट को बताया गया कि सबवे में चल रहे रैन बसेरों के प्रवेश और निकास द्वारों पर ठंड से बचाव के लिए उचित कवर नहीं हैं और बिस्तरों की संख्या भी पर्याप्त नहीं हैं। इस पर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस, एमसीडी और डूसिब के नोडल अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे चौबीसों घंटे निगरानी रखें और जहां भी कमी मिले, उसे तुरंत दूर करें।

24 जनवरी को साकेत कोर्ट में होगी समीक्षा बैठक

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने साकेत कोर्ट कॉम्प्लेक्स के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को 24 जनवरी को सुबह 10 बजे सभी हितधारकों की बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। इस बैठक में सरकारी एजेंसियों के वही अधिकारी शामिल होंगे जिन्होंने पिछली बैठकों में भाग लिया था。 कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी एजेंसियां एम्स प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर काम करें ताकि व्यवस्थाओं में कोई बाधा न आए। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।

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