दिल्ली पुलिस ने शेल कंपनियों के जरिए साइबर फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़ किया, 20 शेल कंपनियों से 180 करोड़ की साइबर ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने न्यू दिल्ली डिस्ट्रिक्ट में ऑपरेशन साइ-हॉक के तहत एक बड़े साइबर क्राइम सिंडिकेट का पता लगाया है, जो शेल कंपनियों के माध्यम से ठगी के पैसे को लेयरिंग करके सिफॉन ऑफ कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि जांच में करीब 180 करोड़ रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है।

न्यू दिल्ली डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी देवेश कुमार महला ने बताया कि एनसीआरपी पर आई शिकायतों की जांच के दौरान आईडीएफसी बैंक की एक अकाउंट फ्लैग हुई, जो एम/एस कुद्रेमुख ट्रेडिंग (ओपीसी) प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर थी। यह अकाउंट कनॉट प्लेस के स्टेट्समैन हाउस में रजिस्टर्ड था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह म्यूल अकाउंट था, जिसमें देशभर से साइबर ठगी के पैसे आ रहे थे और आगे ट्रांसफर किए जा रहे थे।

इस आधार पर साइबर पुलिस स्टेशन, न्यू दिल्ली डिस्ट्रिक्ट में 19 नवंबर को एफआईआर दर्ज की गई। जांच आगे बढ़ाने पर अकाउंट का लिंक राजेश खन्ना से जुड़ा, जिसने खुलासा किया कि वह सुशील चावला और राजेश कुमार शर्मा के इशारे पर कंपनी डायरेक्टर बना और अकाउंट खोला। दोनों आरोपियों के पास फंड ट्रांसफर का कंट्रोल था। राजेश खन्ना ने बताया कि उन्होंने कुल 20 शेल कंपनियां खोलीं, जिनके जरिए ठगी का पैसा सिफॉन किया जा रहा था।

इन कंपनियों की जांच से पता चला कि ये सभी शेल एंटिटी थीं, जिनके अकाउंट्स में देशभर से साइबर फ्रॉड की रकम लेयरिंग के जरिए आ रही थी। कुल 176 एनसीआरपी शिकायतें मिलीं, जिनमें करीब 180 करोड़ रुपये की ठगी जुड़ी हुई है। जांच में आगे पता चला कि राजेश खन्ना की नोएडा में मौत हो चुकी है। सुशील चावला और राजेश कुमार ने शुरुआत में जांच में सहयोग किया, लेकिन बाद में सवालों से बचने लगे और नोटिस की अवहेलना की। उनके फोन में संदिग्ध चैट्स मिले, जिसके आधार पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे कोलकाता के उद्योगपति पवन रुइया के लिए काम कर रहे थे, जो पश्चिम बंगाल में इसी तरह के साइबर फ्रॉड मामलों में शामिल बताया जा रहा है। घटनास्थल से दो मोबाइल फोन और एक लैपटॉप बरामद किया गया।

डीसीपी ने बताया कि आरोपियों का आपराधिक नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। आगे की जांच जारी है और बैंक अकाउंट्स व डिवाइस को इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) को क्रॉस-वेरिफिकेशन के लिए भेजा गया है। अन्य सह-आरोपियों की तलाश जारी है।

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