रान्होला मर्डर केस का भगोड़ा को क्राइम ब्रांच ने कासगंज से पकड़ा, राजस्थान-हरियाणा-UP में 11 साल छिपता रहा कातिल

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 11 साल से लंबित एक अंधे हत्याकांड की गुत्थी सुलझा दी है। 2014 में रान्होला थाना क्षेत्र में नाले के किनारे जिस व्यक्ति की लाश बरामद हुई थी, उसके हत्यारे लखन सिंह उर्फ अंश कुमार उर्फ राजू को आखिरकार उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले से गिरफ्तार कर लिया गया। वह इस केस में 2015 से ही भगोड़ा घोषित था और राजस्थान, हरियाणा व यूपी के अलग-अलग इलाकों में छिपकर जिंदगी काट रहा था।

डीसीपी क्राइम-IV पंकज कुमार ने बताया कि 21 नवंबर 2014 को रान्होला पुलिस को पीसीआर कॉल मिली थी कि खेड़ी बाबा पुल के पास होली कॉन्वेंट स्कूल के नजदीक नाले के किनारे एक शव पड़ा है। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि 40-45 साल के व्यक्ति का चेहरा और सिर पूरी तरह कुचला हुआ था। कई गहरे घाव थे। केस दर्ज हुआ। बाद में मृतक की पहचान राकेश उर्फ भगत के रूप में हुई और हत्यारा लखन सिंह निकला। लेकिन लखन मौके से फरार हो गया। 28 सितंबर 2015 को तीस हजारी कोर्ट ने उसे PO घोषित कर दिया।

क्राइम ब्रांच की टीम पुराने हत्याकांडों पर लगातार काम कर रही थी। इंस्पेक्टर पुखराज सिंह को जब यह केस मिला तो उन्होंने ठान लिया कि भगोड़े को पकड़कर रहेंगे। कई राज्यों में छापेमारी की गई। आखिरकार इंस्पेक्टर पुखराज सिंह और ASI प्रदीप को सूचना मिली कि आरोपी कासगंज के नरदौली गांव में छिपा है। 10 दिसंबर 2025 को इंस्पेक्टर पुखराज सिंह की अगुआई में एसआई निरंजन, ASI प्रदीप, ASI पवन, हेड कांस्टेबल सचिन, दिनेश, विक्रांत और कांस्टेबल मनोज की टीम ने कासगंज पहुंचकर घेराबंदी की और लखन सिंह उर्फ अंश कुमार उर्फ राजू (43 वर्ष) को धर दबोचा।

डीसीपी पंकज कुमार ने बताया कि आरोपी मूल रूप से राजस्थान के करौली जिले के गांव भवली का रहने वाला है। दिल्ली के नजफगढ़ अर्जुन पार्क में पीओपी का काम करता था। शादीशुदा है, चार बच्चे हैं। हत्या के बाद 11 साल तक फर्जी नामों और अलग-अलग ठिकानों पर छिपता रहा। यह गिरफ्तारी साबित करती है कि अपराधी कितने भी साल छिप ले, पुलिस का लंबा हाथ उसे जरूर पकड़ेगा। पुराने हत्याकांडों को सुलझाने का सिलसिला जारी रहेगा।

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