IPS शंकर चौधरी के विरुद्ध भ्रष्टाचार और शक्तियों के दुरुपयोग का मामला दर्ज; विजिलेंस जांच में ‘अवैध’ ऑपरेशनों का खुलासा

नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की विजिलेंस यूनिट ने 2011 बैच के एजीएमयूटी कैडर के आईपीएस अधिकारी शंकर चौधरी के विरुद्ध भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और शक्तियों के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज की है। 05 फरवरी 2026 को दर्ज यह मामला नवंबर 2023 की उन घटनाओं पर आधारित है, जब चौधरी मिजोरम में तैनात थे, लेकिन उन्होंने दिल्ली में आकर अनधिकृत रूप से छापेमारी और अवैध हिरासत जैसी वारदातों को अंजाम दिया।

विजिलेंस जांच में सामने आया कि 20 नवंबर 2023 को छुट्टी खत्म होने के बावजूद आईपीएस शंकर चौधरी ने बिना किसी आधिकारिक आदेश के दिल्ली में रुकने का फैसला किया। उन्होंने दिल्ली पुलिस मुख्यालय या स्थानीय थानों को सूचित किए बिना डाबड़ी और बिंदापुर इलाकों में छापेमारी का नेतृत्व किया। इस दौरान उन्होंने दिल्ली पुलिस के संसाधनों और सरकारी वाहनों का अनधिकृत उपयोग किया, जबकि उनके पास इन ऑपरेशनों के लिए कोई कानूनी अधिकार क्षेत्र नहीं था।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, 25-26 नवंबर की रात को ‘हैरिसन’ नामक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया। नियमों के विरुद्ध उसे किसी पुलिस लॉक-अप के बजाय वसंत विहार स्थित ‘मिजोरम हाउस’ में तीन दिनों तक अवैध रूप से कैद रखा गया। इस दौरान न तो कोई गिरफ्तारी मेमो बनाया गया और न ही उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। यह संविधान के अनुच्छेद 22(2) का सीधा उल्लंघन पाया गया है।

सबसे चौंकाने वाला खुलासा संपत्ति की जब्ती और उगाही को लेकर हुआ है। CCTV फुटेज में आईपीएस अधिकारी और उनकी टीम को हैरिसन के घर से एक लॉकर और दो बैग लेकर निकलते देखा गया, जिनका कोई रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में नहीं है। इसे ‘आपराधिक विश्वासघात’ माना गया है। वहीं, 29 नवंबर को एक नाइजीरियाई महिला की पीसीआर कॉल ने मामले को पुख्ता कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया कि शंकर चौधरी ने उसके भाई को पकड़कर 35 लाख रुपये ले लिए हैं और 20 लाख की और मांग कर रहे हैं।

जांच में दिल्ली पुलिस के तीन कर्मचारियों—HC शालुज, HC विकास और HC प्रशांत—की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जो अनधिकृत रूप से अधिकारी के साथ काम कर रहे थे। संयुक्त सीपी (दक्षिणी रेंज) ने अपनी रिपोर्ट में आईपीएस शंकर चौधरी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही के साथ-साथ ‘गंभीर कदाचार’ के लिए “मेजर पेनल्टी” की सिफारिश की है। फिलहाल हैरिसन के नाइजीरिया भाग जाने के कारण रिश्वत और वसूली के संदेह को और बल मिला है।

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