जज्बे के मिसाल की कहानी, सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित छात्र को गूगल में नौकरी

राष्ट्रीय जजमेंट न्यूज

अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बीमारी सफलता की राह में रोड़ा नहीं बन सकती। इस बात को सच कर दिखाया है आईआईटी गुवाहाटी के एक छात्र और 14 बच्चों ने। ये ऐसी बीमारियों से पीड़ित हैं, जिसमें इनसे किसी बड़ी उपलब्धि की अपेक्षा नहीं की जा सकती। फिर भी इन्होंने जीवन की तमाम चुनौतियों को दरकिनार कर सफलता हासिल की।

सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित छात्र को गूगल में नौकरी
सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित आईआईटी गुवाहाटी के छात्र को गूगल में ड्रीम पैकेज मिला है। व्हीलचेयर के सहारे चलने वाले 22 वर्षीय प्रणव नायर ने अपने धैर्य और दृढ़ संकल्प से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी (आईआईटीजी) से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की। कई चुनौतियों को पार करने के बाद उन्हें यह सफलता मिली। नायर ने कहा, विश्वस्तर पर कंपनी में रोजगार पाने का सफर आसान नहीं था, लेकिन माता-पिता और संस्थान में शिक्षकों के सहयोग से मैं सफल रहा। मेरे साथ माता-पिता ने भी मेरी बचपन की चुनौतियों को देखा। उनका विश्वास था कि मैं अन्य बच्चों की तरह स्कूल में पढ़ाई कर सकता हूं। हालांकि, ज्यादातर स्कूलों ने मुझको प्रवेश देने से इन्कार किया था। वे स्कूल में लिफ्ट न होने जैसे बहाने बनाते थे।

स्टार्टअप कंपनियों में मॉक इंटरव्यू और प्रशिक्षण से मिला आत्मबल
नायर ने कहा, स्टार्टअप कंपनियों में मॉक इंटरव्यू और प्रशिक्षण अनुभवों के साथ-साथ विभिन्न कोडिंग प्लेटफार्मों पर लगातार ऑनलाइन तैयारी ने भी मुझे कॉर्पोरेट अपेक्षाओं के बारे में अधिक तैयार और जागरूक होने में मदद की। मैं यह भी चाहता हूं कि मेरी शारीरिक अक्षमता मुझे मेरे काम के दौरान किसी भी तरह से परेशान न करे और मैं अपना कॅरिअर और निजी जीवन में संतुलन बैठा सकूं।

क्या है बीमारी
सेरेब्रल पाल्सी न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो चलने में मांसपेशियों के खिंचाव, निगलने में परेशानी जैसी समस्याओं को बढ़ाती है। यह बच्चे को मां के गर्भ में रहते ही मस्तिष्क के असामान्य विकास के कारण होती है।

सामान्य बच्चों जैसा नहीं था बचपन
नायर ने कहा, मेरा बचपन सामान्य बच्चों की तरह नहीं था। बीमारी के कारण अन्य बच्चों की तरह पिकनिक जाना, पार्क में सबके साथ खेलना जैसी अन्य गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले पाता था।

ओमान से पूरी की स्कूली शिक्षा
ओमान के मस्कट में स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद मैं डॉक्टर बनना चाहता था, लेकिन माता-पिता ने कहा कि ऐसे कॅरिअर के बारे में सोचना चाहिए जहां शारीरिक अक्षमता कमजोरी न बने। इसके बाद कंप्यूटर में मेरी रुचि बढ़ी।

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