साइबर नॉर्थ थाना पुलिस ने जीजा के बैंक खाते से ₹1.48 लाख उड़ाने वाले शातिर साले को दबोचा; लकवाग्रस्त जीजा की सेवा करने के बहाने जीता था परिवार का भरोसा

नई दिल्ली: दिल्ली के उत्तरी जिले की साइबर थाना पुलिस टीम ने पारिवारिक विश्वास और डिजिटल बैंकिंग के भरोसे को तार-तार करने वाले एक बेहद संवेदनशील और शातिराना धोखाधड़ी के मामले का पर्दाफाश किया है। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए एक ऐसे आरोपी साले को गिरफ्तार किया है, जिसने ब्रेन स्ट्रोक के कारण लकवा का शिकार हुए अपने ही जीजा के बैंक खातों से करीब ₹1.48 लाख की रकम पार कर दी। गिरफ्तार आरोपी की पहचान शुभम जैन (26) निवासी बुराड़ी, दिल्ली के रूप में हुई है। पुलिस टीम ने तकनीकी सर्विलांस और बैंक खातों के बारीक ट्रेल का विश्लेषण कर आरोपी को दबोचा है। इस प्रभावी कार्रवाई से साइबर नॉर्थ थाने में दर्ज अमानत में खयानत और धोखाधड़ी के एक गंभीर मामले का सफल खुलासा हुआ है।

उत्तरी जिले के डीसीपी राजा बंठिया ने बताया कि 13 मई को बुराड़ी निवासी पीड़ित रोहन अग्रवाल ने नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपने बैंक खातों से अनधिकृत ट्रांजैक्शन होने की शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया कि वह बुराड़ी में एक ट्यूशन सेंटर चलाता है, जिसकी पूरी फीस उसकी मां के बैंक खाते में आती है। जब बिजनेस पार्टनर्स ने खाते की समीक्षा की, तो पता चला कि बिना खाताधारकों की जानकारी और सहमति के कुल ₹1,48,626/- की राशि धोखाधड़ी से ट्रांसफर कर ली गई है। शिकायत के आधार पर साइबर नॉर्थ थाने में ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए साइबर नॉर्थ के एसएचओ इंस्पेक्टर रोहित गहलोत के पर्यवेक्षण और एसीपी (ऑपरेशन्स) विशेष धत्तरवाल के मार्गदर्शन में महिला सब-इंस्पेक्टर अंशुल गुप्ता, हेड कांस्टेबल राम किशन और कांस्टेबल आकाश की एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया। जांच टीम ने सबसे पहले पीड़ित के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच की, लेकिन उसमें कोई भी संदिग्ध या वायरस वाला ऐप नहीं मिला। इसके बाद टीम ने उस बैंक खाते की डिटेल्स निकाली, जिसमें पैसे भेजे गए थे। जांच में पता चला कि ₹1,46,000/- की रकम ‘आतम जीत सिंह’ नामक व्यक्ति के एयरटेल पेमेंट्स बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी।

कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और बैंक स्टेटमेंट के तकनीकी विश्लेषण से पता चला कि आतम जीत सिंह के खाते में आई यह रकम बाद में शुभम जैन के खाते में ट्रांसफर की जा रही थी। इसी वित्तीय ट्रेल के दौरान एक और सुराग मिला कि आतम जीत सिंह के खाते से ₹4,000/- एक ट्रैवल एजेंसी को ट्रांसफर किए गए थे। जब पुलिस ने ट्रैवल एजेंसी के मालिक से पूछताछ की, तो उसने बताया कि यह पेमेंट 9 मई को दिल्ली से मणिकरण के लिए एक गाड़ी बुक करने के एवज में शुभम जैन नाम के युवक द्वारा किया गया था। कड़ियों को जोड़ने पर साफ हो गया कि पीड़ित का साला शुभम जैन ही इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड है। पुलिस टीम ने जाल बिछाकर 20 मई को आरोपी शुभम जैन को गिरफ्तार कर लिया और मामले में बीएनएस की धारा 316(2) को जोड़ा।

पूछताछ के दौरान आरोपी शुभम जैन ने खुलासा किया कि वह 10वीं पास है और पूरी तरह बेरोजगार है। समाज और परिवार के सामने अपनी झूठी शान और नकली रूतबा बनाए रखने के लिए उसने एक कहानी गढ़ रखी थी कि वह एक नामी कंपनी में बड़ी नौकरी करता है और काम के सिलसिले में अक्सर विदेश यात्रा पर जाता रहता है। अपने इस झूठ को सच साबित करने के लिए वह अपने फोन में दो अलग-अलग व्हाट्सएप अकाउंट चलाता था और अपने ही दूसरे नंबर से खुद को फर्जी एम्प्लॉयर बनाकर चैट करता था। वह इन फर्जी बातचीत के स्क्रीनशॉट जीजा के परिवार को दिखाकर उनका भरोसा जीतता था।

जनवरी 2026 में जब उसके जीजा रोहन अग्रवाल को ब्रेन स्ट्रोक के कारण पैरालिसिस हो गया, तो शुभम सेवा करने के बहाने उनके घर पर ही आकर रहने लगा। उसने दैनिक कार्यों और इलाज के बहाने जीजा के फोन और बैंकिंग पासवर्ड का एक्सेस हासिल कर लिया। इसके बाद वह दवाइयों और घर के खर्चों के भुगतान के नाम पर चुपके से जीजा के खाते से अपने दोस्त आतम जीत सिंह के खाते में छोटी-छोटी रकमें ट्रांसफर करने लगा। उसने अपने दोस्त को झांसा दे रखा था कि यह उसके काम के पैसे हैं, जो किसी तकनीकी कारण से सीधे उसके खाते में नहीं आ पा रहे हैं। आरोपी शुभम इन पैसों का इस्तेमाल मणिकरण घूमने और अपने निजी ऐश-ओ-आराम के लिए कर रहा था। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है और मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

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