कम किराए का लालच देकर देर रात सवारियों को फंसाने वाले फर्जी रैपिडो राइडर आईपी एस्टेट थाना पुलिस ने दबोचा, चोरी की बाइक और 2 फोन बरामद

नई दिल्ली: दिल्ली के सेंट्रल जिले की आईपी एस्टेट थाना पुलिस टीम ने यात्रियों की सुरक्षा और स्ट्रीट क्राइम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक बेहद शातिर फर्जी रैपिडो राइडर को वारदात के महज दो घंटे के भीतर गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मुनेंद्र (37) के रूप में हुई है, जो सिंघू गांव, दिल्ली का रहने वाला है। पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज के गहन विश्लेषण और तकनीकी सर्विलांस के आधार पर आरोपी को विकास मार्ग इलाके से घेराबंदी कर दबोचा है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से पीड़ित का छीना गया सैमसंग मोबाइल फोन, गुलाबी बाग थाने के मामले से जुड़ा एक अन्य टेक्नो पोवा मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल बरामद की है। जांच में यह मोटरसाइकिल नरेला थाने से चोरी की पाई गई है। इस त्वरित कार्रवाई से पुलिस ने झपटमारी और वाहन चोरी के तीन मामलों का सफल खुलासा किया है।

सेंट्रल जिले के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि 20 मई को आईपी एस्टेट थाने में एक यात्री से फर्जी बाइक टैक्सी राइडर द्वारा मोबाइल झपट कर भागने की शिकायत मिली थी। सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम तुरंत आईटीओ के बहादुर शाह जफर मार्ग स्थित हंस भवन के पास मौके पर पहुंची। पीड़ित शिकायतकर्ता ने बताया कि उसे ओखला के तेखंड गांव जाना था। रास्ते में एक बाइक सवार ने खुद को रैपिडो राइडर बताया और सामान्य से बेहद कम किराया तय कर उसे अपनी बाइक पर बैठा लिया। बीएसजे मार्ग के पास पहुंचकर राइडर ने चालाकी दिखाई और पीड़ित से कहा कि आगे पुलिस की चेकिंग चल रही है और उसने हेलमेट नहीं पहना है, इसलिए वह यहीं उतर जाए। जैसे ही पीड़ित बाइक से उतरकर सड़क पार करने लगा, आरोपी राइडर ने झपट्टा मारकर उसका सैमसंग मोबाइल फोन छीन लिया और तेजी से बाइक दौड़ाकर फरार हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईपी एस्टेट थाने में बीएनएस की धारा 304(2)/317(2) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।

वारदात की संवेदनशीलता को देखते हुए कमला मार्केट सब-डिवीजन के एसीपी राजीव भारद्वाज के समग्र पर्यवेक्षण और आईपी एस्टेट के एसएचओ इंस्पेक्टर नरेश कुमार के करीबी नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। इस टीम में सब-इंस्पेक्टर योगेश पूनिया, हेड कांस्टेबल ललित, कांस्टेबल राहुल और प्रकाश शामिल थे। जांच टीम ने बिना समय गंवाए घटनास्थल और उसके आसपास के रास्तों पर लगे कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला। मुस्तैद टीम ने तकनीकी इनपुट और स्थानीय खुफिया जानकारी के माध्यम से आरोपी की पहचान सुनिश्चित की और वारदात के महज दो घंटे के भीतर विकास मार्ग से आरोपी मुनेंद्र को दबोच लिया।

गहन पूछताछ के दौरान आरोपी मुनेंद्र ने अपना जुर्म कबूल कर लिया और अपने अनोखे मॉडस ऑपेरंडी का खुलासा किया। उसने बताया कि वह जानबूझकर देर रात के समय यात्रा करने वाले सीधे-साधे यात्रियों को निशाना बनाता था। वह फर्जी रैपिडो राइडर बनकर यात्रियों को कम किराए का लालच देता था ताकि वे आसानी से उसकी बाइक पर बैठ जाएं। इसके बाद वह किसी सुनसान जगह पर बाइक रोककर आगे पुलिस चेकिंग होने का झूठा बहाना बनाता था और हेलमेट न होने की बात कहकर सवारी को उतार देता था। जैसे ही सवारी का ध्यान भटकता, वह मोबाइल छीनकर रफूचक्कर हो जाता था। रात के समय कम भीड़ होने के कारण उसे भागने में आसानी होती थी।

पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि आरोपी मुनेंद्र एक आदतन अपराधी है। वह पहले भी नरेला इंडस्ट्रियल एरिया, विजय विहार, अलीपुर, कश्मीरी गेट और रेलवे थानों में दर्ज चोरी, वाहन चोरी, झपटमारी और आर्म्स एक्ट के छह अलग-अलग संगीन मामलों में शामिल रह चुका है। उसके पास से मिली मोटरसाइकिल की जब जांच की गई तो वह भी नरेला थाने में दर्ज ई-एफआईआर के तहत चोरी की पाई गई। इसके अलावा उसके पास से मिला दूसरा टेक्नो पोवा मोबाइल फोन गुलाबी बाग थाने में दर्ज एक मामले से जुड़ा हुआ है। पुलिस अब आरोपी से आगे की पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने देर रात को इस तरह की और कितनी वारदातों को अंजाम दिया है।

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