‘डिजिटल अरेस्ट’ और ‘फेक डेटिंग क्लब’ चलाने वाले बड़े सिंडिकेट ध्वस्त; सात राज्यों में की छापेमारी, 40 करोड़ रुपये के फ्रॉड नेटवर्क का भंडाफोड़

नई दिल्ली: दिल्ली के पश्चिम जिले की साइबर थाना पुलिस टीम ने संगठित साइबर अपराधियों और अंतरराज्यीय ठग गिरोहों के खिलाफ अप्रैल 2026 के पूरे महीने एक बेहद आक्रामक और देशव्यापी अभियान चलाकर ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए डिजिटल अरेस्ट, म्यूल अकाउंट्स, फर्जी इनवेस्टमेंट, नकली डेटिंग क्लब और एपीके वायरस घोटालों में शामिल कुल 89 साइबर अपराधियों को कानून के शिकंजे में कसा है। इनमें से 35 हार्डकोर ठगों को बाकायदा गिरफ्तार किया गया है, जबकि 54 अन्य को कानूनी रूप से पाबंद किया गया है। वेस्ट जिला पुलिस ने इस महाऑपरेशन के जरिए करीब 40 करोड़ रुपये के अखिल भारतीय फ्रॉड नेटवर्क को बेनकाब करते हुए ठगों के कब्जे से 14.18 लाख रुपये नगद, 359 सिम कार्ड, 218 एटीएम कार्ड, 88 मोबाइल फोन और भारी मात्रा में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जब्त किया है। इसके साथ ही त्वरित कार्रवाई कर पीड़ितों के 1.11 करोड़ रुपये डूबने से बचाए गए हैं और 51.95 लाख रुपये की रकम अदालत के जरिए सीधे पीड़ितों के खातों में वापस करा दी गई है।

पश्चिम जिले के डीसीपी दराड़े शरद भास्कर ने बताया कि ऑपरेशन्स सेल के एसीपी विजय सिंह के करीबी सुपरविजन और साइबर थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर विकास कुमार बुलडक के नेतृत्व में कई विशेष तकनीकी टीमों का गठन किया गया था। इन टीमों ने लगातार एक महीने तक झारखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और दिल्ली में दिन-रात छापेमारी कर संगठित साइबर सिंडिकेट्स की रीढ़ तोड़ दी। इस पूरे अभियान के दौरान मुख्य रूप से तीन बड़े सनसनीखेज मामलों का पर्दाफाश किया गया है।

चौथी मंजिल से कूदकर भाग रहा था ‘DL Office’ म्यूल अकाउंट सिंडिकेट, 6 गिरफ्तार

साइबर पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि दिल्ली के करमपुरा इलाके में एक किराए के मकान से ओटीपी राउटिंग और म्यूल बैंक खातों को संचालित करने वाला एक बहुत बड़ा गिरोह चल रहा है। इस सूचना पर सब-इंस्पेक्टर हरिओम, अमित, योगेश, प्रवीन और हेड कांस्टेबल पवन व संजीत की टीम ने वहां छापेमारी की। पुलिस को देखते ही आरोपियों ने घबराहट में चौथी मंजिल से कूदकर भागने का ड्रामाई प्रयास किया, लेकिन अलर्ट पुलिसकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी को मौके पर ही दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिट्टू चौधरी, लविश चुघ, ऋषि, अरुण सिंह, आशीष और दीपक भट्ट के रूप में हुई है। ये आरोपी व्हाट्सएप पर “DL Office” नाम से ग्रुप बनाकर केंद्रीयकृत ओटीपी शेयरिंग सिस्टम चला रहे थे। इनके कब्जे से 43 स्मार्टफोन, 313 सिम कार्ड और 184 एटीएम कार्ड बरामद हुए। समन्वय पोर्टल के जरिए जांच करने पर देश भर में इनके खातों के खिलाफ 35 शिकायतें और करीब 40 करोड़ रुपये की ठगी का लिंक मिला है।

टेलीग्राम आधारित ‘फेक डेटिंग क्लब’ और क्रिप्टो फ्रॉड मॉड्यूल का पर्दाफाश

एक अन्य बड़े मामले में सब-इंस्पेक्टर विकास राठी, हेड कांस्टेबल जगदीश और वेद प्रकाश की टीम ने फर्जी फ्रेंडशिप ऑफर और टेलीग्राम बोट्स के जरिए “VIP मेंबरशिप” के नाम पर लोगों को हनीट्रैप में फंसाने वाले गिरोह के तीन शातिर ठगों—सचिन रावत, अक्षय कुमार बालियान और कार्तिकेय चौधरी को गिरफ्तार किया। ये आरोपी पीड़ितों को भावनात्मक रूप से जाल में फंसाकर पैसे ऐंठते थे और फिर उन रुपयों को म्यूल अकाउंट्स के जरिए यूएसडीटी क्रिप्टो करेंसी में बदल लेते थे। इस गिरोह के डिजिटल इनवेस्टिगेशन के दौरान इनके आईपी एड्रेस के तार सीधे अफ्रीका महाद्वीप से जुड़े मिले हैं। इनके पास से देश भर की 28 एनसीआरपी शिकायतें जुड़ी पाई गई हैं।

डिजिटल अरेस्ट’ कर बुजुर्गों को डराने वाले गिरोह पर पंजाब और झारखंड में प्रहार

साइबर थाने की तीसरी टीम (सब-इंस्पेक्टर गौरव, हेड कांस्टेबल नरेश, कांस्टेबल कपिल, मनीष और दिनेश) ने एक वरिष्ठ नागरिक को मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर “डिजिटल अरेस्ट” करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। पुलिस टीम ने मनी ट्रेल का पीछा करते हुए पंजाब के लुधियाना और झारखंड के जमशेदपुर में ताबड़तोड़ छापेमारी कर चार आरोपियों—अशोक कुमार, सूरज कुमार, दीपू कुमार और विवेक कुमार को गिरफ्तार किया। ये आरोपी भी ठगी की रकम को लेयर्ड ट्रांजैक्शन के जरिए क्रिप्टो करेंसी में बदलते थे। इनके पास से 7 चेक बुक, 11 डेबिट कार्ड और 18 सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।

डीसीपी ने बताया कि इस अभूतपूर्व कार्रवाई से न केवल करोड़ों रुपये की ठगी का खुलासा हुआ है, बल्कि पेशेवर और वैज्ञानिक पुलिसिंग के जरिए अपराधियों को बड़ा झटका लगा है। वेस्ट जिला पुलिस आम नागरिकों को ऐसे उभरते साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इन सभी मामलों में आगे की कानूनी व वित्तीय जांच गहराई से जारी है।

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