कम्बोडियाई ठगों से जुड़े अंतरराज्यीय निवेश फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश; आठ उच्च शिक्षित आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली: दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले की साइबर थाना पुलिस टीम ने ऑनलाइन इनवेस्टमेंट फ्रॉड के खिलाफ एक बहुत बड़ी और सुनियोजित कार्रवाई करते हुए एक अंतरराज्यीय साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में देश के अलग-अलग राज्यों से कुल 8 शातिर और उच्च शिक्षित आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके तार कम्बोडिया में बैठे विदेशी ऑपरेटरों से जुड़े हुए थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरमनजोत सिंह (मोहाली, पंजाब), कैसर मसूदी (मोहाली, पंजाब), अभिषेक (पानीपत, हरियाणा), मोहम्मद जाहिद (जाफराबाद, दिल्ली), आमिर मलिक (जाफराबाद, दिल्ली), अमरजीत अहिरवार (जबलपुर, मध्य प्रदेश), आलोक शर्मा (जबलपुर, मध्य प्रदेश) और अनंत पांडे (रीवा, मध्य प्रदेश) के रूप में हुई है। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपियों के कब्जे से आठ मोबाइल फोन, आपत्तिजनक बैंकिंग दस्तावेज, कमीशन शेयरिंग के रिकॉर्ड और कई डिजिटल सबूत बरामद किए हैं। इस सिंडिकेट ने फर्जी फर्मों के करंट अकाउंट्स के जरिए महज 14 दिनों में लगभग 4.5 करोड़ रुपये का संदिग्ध ट्रांजैक्शन किया था।

साउथ-वेस्ट जिले के डीसीपी अमित गोयल ने बताया कि साइबर थाने में एक पीड़ित ने ऑनलाइन स्टॉक मार्केट में निवेश के नाम पर करीब 24 लाख रुपये की ठगी के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। पीड़ित ने बताया कि उसे एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया था, जहां ग्रुप के एडमिन सदस्यों को स्टॉक ट्रेडिंग में निवेश करने पर भारी मुनाफे का झांसा देते थे। ग्रुप में शेयर किए गए मुनाफे के फर्जी स्क्रीनशॉट्स को सच मानकर पीड़ित ने ठगों के बताए अनुसार विभिन्न बैंक खातों में लगभग 24 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब पीड़ित ने अपना पैसा और मुनाफा वापस निकालना चाहा, तो ठगों ने तरह-तरह के बहाने बनाकर और पैसों की मांग की। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी।

मामले की गंभीरता और विदेशी कनेक्शन को देखते हुए साउथ-वेस्ट जिले की एसीपी (ऑपरेशंस) संघमित्रा के करीबी सुपरविजन और साइबर थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर प्रवेश कौशिक के नेतृत्व में एक विशेष तकनीकी टीम का गठन किया गया, जिसमें सब-इंस्पेक्टर चेतन राणा, राजेश, हेड कांस्टेबल मनेंद्र, विजयपाल, दशरथ और पुनीत को शामिल किया गया।

जांच टीम ने जब व्हाट्सएप नंबरों और पैसों के लेनदेन (मनी ट्रेल) का तकनीकी विश्लेषण किया, तो पता चला कि वारदात में इस्तेमाल व्हाट्सएप नंबर कम्बोडिया से ऑपरेट किए जा रहे थे और ठगी के तुरंत बाद फर्जी वेबसाइट को बंद कर दिया गया था। पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए पाया कि ठगी की रकम देश के अलग-अलग राज्यों में फर्जी शेल कंपनियों के नाम पर खोले गए ‘म्यूल अकाउंट्स’ (दूसरों के नाम पर किराए के खाते) में भेजी जा रही थी। तफ्तीश के दौरान 6.70 लाख रुपये की रकम पानीपत के रहने वाले अभिषेक से जुड़े ‘न्यू जर्नी ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड’ के यस बैंक खाते में पाई गई। पुलिस ने पंजाब के मोहाली और हरियाणा के पानीपत में छापेमारी कर अभिषेक, हरमनजोत और कैसर मसूदी को गिरफ्तार कर लिया, जो साइबर ठगों को यह खाते उपलब्ध कराते थे।

इसके बाद जांच में सामने आया कि एक्सिस बैंक में ‘एमजे एंटरप्राइजेज’ नाम से खुले खाते में 2.60 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे, जो दिल्ली के जाफराबाद निवासी मोहम्मद जाहिद और आमिर मलिक से जुड़ा था। पुलिस ने दिल्ली में छापेमारी कर इन दोनों को भी दबोच लिया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि राजस्थान के रहने वाले ‘सलमान’ नाम के एक शख्स के निर्देश पर इस खाते को एपीके आधारित रिमोट एक्सेस ऐप के जरिए विदेशों से गुप्त रूप से कंट्रोल किया जा रहा था।

इसी मनी ट्रेल का पीछा करते हुए पुलिस मध्य प्रदेश के जबलपुर में ‘कान्हा ट्रेडर्स’ नाम के अकाउंट तक पहुंची, जिसे अमरजीत अहिरवार और आलोक शर्मा ऑपरेट कर रहे थे। एमपी में कई ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद पुलिस ने इन दोनों को दबोचा। इनकी गवाही पर पुलिस ने रीवा से मुख्य कड़ी अनंत पांडे को गिरफ्तार किया। अनंत पांडे एन्क्रिप्टेड व्हाट्सएप चैट के जरिए सीधे कम्बोडिया के विदेशी हैंडलर्स से जुड़ा हुआ था और वह भारत के खाता सप्लायर्स तथा विदेशी साइबर अपराधियों के बीच मुख्य माध्यम के रूप में काम कर रहा था।

पकड़े गए आरोपियों का प्रोफाइल बेहद चौंकाने वाला है; इनमें से अधिकांश उच्च शिक्षित युवा हैं। आरोपी हरमनजोत सिंह के पास साइबर सुरक्षा में डिप्लोमा है, कैसर मसूदी एमबीए पास है, जबकि आलोक शर्मा और अनंत पांडे बीटेक (B.Tech) डिग्री धारक हैं। अभिषेक ने बी.कॉम किया है। ये सभी पढ़े-लिखे युवा केवल मोटे कमीशन और आसान कमाई के लालच में साइबर अपराधियों के मददगार बन बैठे थे। पुलिस को जांच में पता चला है कि इस गिरोह के बैंक खातों के खिलाफ देश भर में 60 से अधिक एनसीआरपी शिकायतें दर्ज हैं। पुलिस अब इस सिंडिकेट के बाकी वित्तीय लेनदेन और अन्य बैंक खातों को खंगालने के लिए आगे की जांच कर रही है।

Comments are closed.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More