जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे युवक को एसएचओ सुभाष प्लेस ने खुद अस्पताल पहुंचाकर बचाई जान, चाकूबाजी करने वाले 7 नाबालिग पकड़े गए

नई दिल्ली: दिल्ली के उत्तर-पश्चिम जिले की सुभाष प्लेस थाना पुलिस टीम ने संवेदनशीलता, मानवीयता और त्वरित पेशेवर कार्यशैली का परिचय देते हुए शकूरपुर इलाके में हुए एक सनसनीखेज हत्या के प्रयास के मामले को सुलझा लिया है। पुलिस ने इस खूनी वारदात को अंजाम देने वाले सात नाबालिगों को सफलतापूर्वक पकड़ लिया है। पुलिस टीम की मुस्तैदी और समय पर दी गई बेहतरीन चिकित्सीय सहायता के कारण गंभीर रूप से घायल किशोर की जान बचाई जा सकी है। इस त्वरित कार्रवाई से पुलिस ने थाना सुभाष प्लेस में दर्ज हत्या के प्रयास के एक संगीन मामले का सफल खुलासा किया है। जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू घटना से महज तीन दिन पहले ऑनलाइन शॉपिंग साइट फ्लिपकार्ट के माध्यम से मंगवाया गया था।

उत्तर-पश्चिम जिले की डीसीपी आकांक्षा यादव ने बताया कि 15 मई की रात लगभग 08:17 बजे सुभाष प्लेस थाने को सूचना मिली कि शकूरपुर के H-ब्लॉक स्थित मस्जिद वाली गली, चिल्ड्रन पार्क के पास एक लड़के को चाकू मार दिया गया है। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस स्टाफ बिना एक पल गंवाए तुरंत मौके पर पहुंचा। वहां शकूरपुर निवासी श्री शमसुद का 16 वर्षीय बेटा साहिद गंभीर रूप से घायल और लहूलुहान हालत में मिला।

घायल साहिद की स्थिति बेहद नाजुक थी; उसके शरीर के बाईं ओर कमर के पास काले रंग के हैंडल वाला एक बड़ा चाकू अंदर तक धंसा हुआ था और अत्यधिक मात्रा में खून बह रहा था। मामले की गंभीरता और ‘गोल्डन ऑवर’ के महत्व को समझते हुए सुभाष प्लेस थाने के एसएचओ ने व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदारी संभाली। पुलिस स्टाफ ने चाकू को उसी अवस्था में रखते हुए घायल को तुरंत पीसीआर वैन के जरिए पीतमपुरा स्थित भगवान महावीर अस्पताल पहुंचाया। वहां एसएचओ ने डॉक्टरों से आपातकालीन और प्राथमिकता के आधार पर तत्काल चिकित्सा शुरू करने का विशेष अनुरोध किया।

अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद भी घायल साहिद की हालत गंभीर बनी हुई थी, जिसके कारण डॉक्टरों ने उसे जीवन रक्षक उच्च चिकित्सा हेतु सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया। पुलिस ने तुरंत जीवन रक्षक एम्बुलेंस के माध्यम से घायल को सफदरजंग अस्पताल भेजा। इसके साथ ही डॉक्टरों की एक विशेष टीम को भी त्वरित चिकित्सीय सहायता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पुलिस की गाड़ी द्वारा अलग से सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया गया। इस संबंध में शिकायतकर्ता के बयान पर सुभाष प्लेस थाने में बीएनएस की धारा 109(1)/3(5) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।

वारदात की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए उत्तर-पश्चिम जिले की पुलिस उपायुक्त के समग्र पर्यवेक्षण में सुभाष प्लेस थाने की एक समर्पित विशेष टीम का गठन किया गया। इस टीम का नेतृत्व खुद एसएचओ इंस्पेक्टर तेजपाल सिंह ने किया, जिसमें सब-इंस्पेक्टर रूपेश, कांस्टेबल मोहित, कांस्टेबल श्यामवीर और हेड कांस्टेबल प्रवेश को शामिल किया गया। इस पूरी टीम ने सुभाष प्लेस सब-डिवीजन की एसीपी सृष्टि भट्ट के करीबी और कुशल सुपरविजन में काम किया।

जांच टीम ने तुरंत घटनास्थल का मुआयना किया और तकनीकी निगरानी के साथ-साथ स्थानीय मुखबिरों का तंत्र सक्रिय किया। संदिग्धों के ठिकानों और उनके छिपने की जगहों पर दिल्ली-एनसीआर में लगातार कई ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। पुलिस टीम की कड़ी मेहनत और समर्पित प्रयासों के परिणामस्वरूप वारदात के कुछ ही समय के भीतर इसमें शामिल सभी सात नाबालिगों को पहचान कर पकड़ लिया गया। पूछताछ के दौरान पता चला कि इन्होंने आपसी रंजिश के चलते इस खूनी खेल की योजना बनाई थी और ऑनलाइन चाकू मंगवाया था। फिलहाल पकड़े गए सभी नाबालिगों को नियमानुसार बाल सुधार गृह भेजने की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है और मामले की आगे की जांच जारी है।

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