ऑटो में महिला सवारी को बंधक बनाकर लूटने वाले गिरोह का पर्दाफाश, पिता-पुत्र समेत 3 लुटेरे गिरफ्तार, 40 हजार और ऑटो बरामद

नई दिल्ली: दिल्ली के शाहदरा जिले की कृष्णा नगर थाना पुलिस टीम ने सुबह के वक्त सफर करने वाले अकेले यात्रियों को निशाना बनाने वाले एक बेहद शातिर और कुख्यात ऑटो लुटेरा गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए एक महिला यात्री से हुई झपटमारी और लूट की वारदात को सुलझाते हुए गिरोह के 3 शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तालिब (24 वर्ष), उसके पिता राशिद (45 वर्ष) और उनके रिश्तेदार वकील (45 वर्ष) के रूप में हुई है। ये तीनों आरोपी मूल रूप से लोनी, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं। पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों के कब्जे और निशानदेही से लूटी गई रकम में से 40,000 रुपये नगद, वारदात में इस्तेमाल ऑटो रिक्शा और घटना के समय पहने गए कपड़े बरामद कर लिए हैं। इस कार्रवाई से पुलिस ने कृष्णा नगर थाने में दर्ज लूट के एक गंभीर मामले का सफल खुलासा किया है।

शाहदरा जिले के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा ने बताया कि 10 मई की सुबह करीब 05:30 बजे वसुंधरा की रहने वाली एक महिला यात्री ईस्ट आजाद नगर मेट्रो स्टेशन से एक ऑटो रिक्शा में सवार हुई थीं। उनके पास एक ट्रॉली बैग और एक काले रंग का पर्स था, जिसमें 55,000 रुपये की नगद राशि रखी हुई थी। यात्रा के दौरान, ऑटो ड्राइवर तालिब ने चालाकी दिखाते हुए रास्ते में दो अन्य व्यक्तियों को यह कहकर ऑटो में बैठा लिया कि वे उसके रोज के पैसेंजर हैं। वे दोनों व्यक्ति महिला के दोनों तरफ बैठ गए और उसे बीच में घेर लिया। कुछ दूर जाने के बाद चालक ने ऑटो में तकनीकी खराबी आने का बहाना बनाकर उसे सड़क किनारे रोक दिया। इसी दौरान मौका पाकर एक आरोपी ने महिला का ट्रॉली बैग सड़क पर फेंक दिया और दूसरे ने उसका रुपयों से भरा पर्स झपट लिया। इसके बाद तीनों आरोपी महिला को असहाय छोड़कर उसी ऑटो से फरार हो गए। इस संबंध में कृष्णा नगर थाने में भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।

मामले की संवेदनशीलता और महिला सुरक्षा से जुड़े होने के कारण गांधी नगर सब-डिवीजन के एसीपी के सुपरविजन और कृष्णा नगर के एसएचओ के नेतृत्व में एक समर्पित खोजी और तकनीकी टीम का गठन किया गया। इस टीम में एएसआई प्रमोद, हेड कांस्टेबल सूरज, सचिन छिकारा, नवीन, कांस्टेबल जॉनी और नीरज शामिल थे, जिन्हें तकनीकी सर्विलांस के लिए एएसआई राहुल, हेड कांस्टेबल अभय पंवार और जितेंद्र का सहयोग मिला।

जांच टीम ने स्थानीय मुखबिरों को सक्रिय करने के साथ-साथ घटनास्थल और आरोपियों के भागने के संभावित रूट पर लगे सीसीटीवी कैमरों का व्यापक विश्लेषण किया। लगातार की गई तकनीकी निगरानी के बाद पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त ऑटो रिक्शा की पहचान की। 16 मई को एक सटीक सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने केला गोदाम के पास नाकेबंदी की और पहले आरोपी वकील को सफलतापूर्वक धर दबोचा। थाने लाकर की गई गहन पूछताछ में उसने अपना जुर्म कुबूल कर लिया और अपने सहयोगियों के नामों का खुलासा किया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने उसी दिन गिरोह के बाकी दो आरोपियों तालिब और राशिद को भी दबोच लिया और उनके पास से लूटी गई रकम में से बांटे गए 40,000 रुपये बरामद कर लिए।

पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपने अजीबोगरीब ‘मोडस ऑपेरंडी’ का खुलासा करते हुए बताया कि वे एक ही परिवार के सदस्य (पिता, पुत्र और रिश्तेदार) हैं और मिलकर इस सिंडिकेट को चला रहे थे। आरोपी तालिब करीब 700 रुपये प्रतिदिन के किराए पर ऑटो लेता था और ये लोग जानबूझकर तड़के या देर रात अकेले सफर करने वाले यात्रियों को विश्वास में लेकर अपने ऑटो में बैठाते थे और फिर सुनसान जगह देखकर लूट लेते थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी वकील एक पुराना और नामी अपराधी है, जिसके खिलाफ वेलकम, दिलशाद गार्डन और शाहीन बाग थानों में लूट, डकैती, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के मामले दर्ज हैं। वहीं, चालक तालिब भी खजूरी खास थाने में दर्ज चोरी और झपटमारी के एक मामले में पहले शामिल रह चुका है। पुलिस अब आरोपियों को रिमांड पर लेकर यह पता लगा रही है कि उन्होंने इस ऑटो से दिल्ली-एनसीआर में और कितनी वारदातों को अंजाम दिया है। मामले की आगे की जांच जारी है।

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