शाहबाद डेयरी थाना पुलिस की त्वरित कार्रवाई बनी नजीर, 3 दिन में जांच पूरी और 4 दिन में दाखिल हुई चार्जशीट, 14 दिनों में स्नैचर को सजा

नई दिल्ली: देश में लागू हुए नए आपराधिक कानूनों की ताकत और प्रभावशीलता का एक ऐतिहासिक और बेमिसाल उदाहरण दिल्ली के आउटर नॉर्थ जिले में देखने को मिला है। शाहबाद डेयरी थाना पुलिस और अभियोजन पक्ष की बेहतरीन जुगलबंदी से महज 14 दिनों के भीतर झपटमारी और लूट के एक मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा पक्की करा दी गई है। गिरफ्तार और दोषी पाए गए आरोपी की पहचान रविंदर (32 वर्ष), निवासी गली नंबर 7, शाहबाद दौलतपुर, दिल्ली के रूप में हुई है। पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए वारदात के तुरंत बाद ही आरोपी के कब्जे से पीड़ित का छीना गया पर्स मौके पर ही बरामद कर लिया था। नए कानूनों के तहत मात्र 72 घंटे में जांच पूरी कर चौथे दिन कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई और अदालत ने महज 10 दिनों के फास्ट ट्रैक ट्रायल के बाद आरोपी को दोषी करार देकर “त्वरित जांच, त्वरित सुनवाई और त्वरित न्याय” के नए युग की शुरुआत कर दी है।

आउटर नॉर्थ जिले के डीसीपी हरेश्वर स्वामी ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए बताया कि एक एम्बेसडर होटल में अकाउंटेंट के रूप में काम करने वाले पीड़ित 1 मई की रात करीब 9:45 बजे शाहबाद डेयरी बस स्टैंड पर बस का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान जब उन्होंने पानी का भुगतान करने के लिए जेब से अपना पर्स निकाला, तभी पीछे से आए एक शातिर बदमाश ने उनके हाथ से पर्स झपट लिया और सेक्टर 28 रोहिणी की तरफ भागने लगा। पीड़ित ने हिम्मत दिखाते हुए तुरंत उसका पीछा किया और करीब 100 मीटर की दूरी पर उसे दबोच लिया। आरोपी ने पर्स लौटाने से साफ मना कर दिया, जिसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही शाहबाद डेयरी थाने के आईओ एएसआई दीपक तुरंत मौके पर पहुंचे और आरोपी रविंदर को छीने गए पर्स सहित रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। पीड़ित के बयान पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।

जॉइंट सीपी (नॉर्दर्न रेंज) विजय सिंह के समग्र पर्यवेक्षण और डीसीपी हरेश्वर स्वामी के रणनीतिक दिशा-निर्देशों के तहत, इस मामले को आउटर नॉर्थ जिले द्वारा स्ट्रीट क्राइम के खिलाफ शुरू किए गए एक स्पेशल मैकेनिज्म के तहत लिया गया। इस तंत्र का उद्देश्य सड़क मार्ग पर होने वाले अपराधों पर कड़ी कार्रवाई करना और बिना समय गंवाए कुछ ही घंटों के भीतर चार्जशीट तैयार कर अदालत में प्रभावी पैरवी करना है। इस मामले में पुलिस ने पेशेवर और वैज्ञानिक कार्यशैली का परिचय देते हुए महज 3 दिनों के भीतर (5 मई तक) पूरी तफ्तीश मुकम्मल कर ली और वारदात के चौथे दिन यानी 6 मई को अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।

इसके बाद न्यायिक प्रक्रिया ने भी ऐतिहासिक तेजी दिखाई। रोहिणी कोर्ट की न्यायाधीश भारती बेनीवाल की अदालत ने चार्जशीट दाखिल होते ही मामले को फास्ट ट्रैक पर लेते हुए डे-टू-डे आधार पर सुनवाई शुरू की। कोर्ट ने तुरंत आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए। सरकारी वकील प्रमोद कुमार ने अदालत के समक्ष पुलिस द्वारा जुटाए गए गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को इतनी सटीकता और प्रभावी ढंग से पेश किया कि आरोपी के बचने का कोई रास्ता नहीं रहा। अदालत ने सुनवाई शुरू होने के मात्र 7वें दिन (13 मई) को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया और 16 मई को (वारदात के ठीक 14वें दिन) अंतिम बहस के बाद आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 304(2) और 317(2) के तहत दोषी करार दे दिया।

इस केस को रिकॉर्ड समय में मुकाम तक पहुंचाने में बवाना सब-डिवीजन के एसीपी जोगिंदर सिंह, शाहबाद डेयरी थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर राजेश मलिक, आईओ एएसआई दीपक, हेड कांस्टेबल नीरज और कांस्टेबल जिंदर की संयुक्त टीम ने दिन-रात एक कर शानदार काम किया। डीसीपी हरेश्वर स्वामी ने कहा कि यह 14 दिनों का रिकॉर्ड केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह आपराधिक तत्वों के लिए एक कड़ा सबक और चेतावनी है। इससे अपराधियों को साफ संदेश गया है कि अब अपराध और उसके अंजाम के बीच का फासला खत्म हो चुका है। त्वरित और वैज्ञानिक न्याय प्रणाली से जनता में पुलिस और कानून के प्रति विश्वास और मजबूत होगा। शाहबाद डेयरी थाने की इस विजेता पुलिस टीम को उनके इस अनुकरणीय कार्य के लिए पुरस्कृत भी किया जा रहा है।

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