दिल्ली में नकली ब्रांडेड कपड़ों के बड़े कारखाने का भंडाफोड़; ब्रांडेड कपड़ों के नाम पर चल रहा था फर्जीवाड़ा, चार गिरफ्तार, 3,400 से ज्यादा नकली जींस और मशीनें बरामद

नई दिल्ली: पश्चिमी दिल्ली जिला पुलिस की जिला जांच इकाई (डीआईयू) ने नारायणा औद्योगिक क्षेत्र में चल रहे नामी ब्रांडों के नकली कपड़े बनाने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने चार अलग-अलग स्थानों पर एक साथ छापेमारी कर लेविस, जारा, केल्विन क्लेन और टॉमी हिलफिगर जैसे अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों की 3400 से अधिक नकली जींस बरामद की हैं। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने सात औद्योगिक सिलाई मशीनें, हजारों की संख्या में फर्जी लेबल, टैग और पैकेजिंग सामग्री भी जब्त की है। पुलिस की इस कार्रवाई से औद्योगिक क्षेत्र में हड़कंप मच गया है।

पुलिस के अनुसार, डीआईयू को सूचना मिली थी कि नारायणा इलाके में कई इकाइयां नामी कंपनियों के ट्रेडमार्क और कॉपीराइट का उल्लंघन कर भारी मात्रा में नकली कपड़े तैयार कर रही हैं। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए नारायणा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया और पटियाला हाउस कोर्ट से तलाशी वारंट प्राप्त किया गया। इसके बाद पुलिस टीम ने जाल बिछाया और 12 मई को चिन्हित किए गए चार ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। इस दौरान कंपनियों के अधिकृत प्रतिनिधि भी पुलिस के साथ मौजूद थे, जिन्होंने बरामद सामान के नकली होने की पुष्टि की।

पहली छापेमारी नारायणा औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 के ए-23/1 में की गई, जहां से कीर्ति नगर निवासी विपिन सरदाना को पकड़ा गया। यहां से पुलिस को लेविस, जारा और टॉमी हिलफिगर जैसी ब्रांडेड कंपनियों की करीब 2510 जींस और चार सिलाई मशीनें मिलीं। दूसरी रेड ए-23 स्थित इकाई पर हुई, जिसका संचालन इंद्रपुरी निवासी ऋषभ गर्ग कर रहा था। यहां से केल्विन क्लेन की जींस के साथ भारी मात्रा में बिना सिली जींस के हिस्से और फर्जी टैग बरामद हुए।

तीसरी और चौथी छापेमारी रिंग रोड और फेज-1 के अन्य ठिकानों पर हुई, जहां से नोएडा निवासी नीरज भाम्बरी और रवि प्रकाश को हिरासत में लिया गया। इन ठिकानों से भी सैकड़ों की संख्या में तैयार जींस और मशीनें बरामद की गईं। जांच में सामने आया है कि ये आरोपी सस्ते कपड़े पर नामी कंपनियों के फर्जी लोगो और बटन लगाकर उन्हें असली बताकर बाजार में बेचते थे। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ी जोड़ने में जुटी है कि इन सामानों की आपूर्ति कहां-कहां की जा रही थी।

इस बड़ी सफलता को अंजाम देने वाली टीम का नेतृत्व महिला उपनिरीक्षक वंदना ने किया, जिसमें उपनिरीक्षक उदयवीर सिंह, सहायक उपनिरीक्षक जितेंद्र व विजेंद्र, हेड कांस्टेबल सूर्य देव और कांस्टेबल अमित व अरविंद शामिल रहे। पूरी कार्रवाई जिला जांच इकाई के एसीपी विजय सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।

पश्चिमी दिल्ली जिले के डीसीपी दराडे शरद भास्कर ने बताया कि कॉपीराइट और ट्रेडमार्क अधिनियम के उल्लंघन के खिलाफ यह एक बड़ी कामयाबी है। उन्होंने कहा कि फर्जीवाड़ा करने वाले लोग न केवल कंपनियों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं, बल्कि ग्राहकों को भी धोखा दे रहे हैं। पुलिस अब इस रैकेट के मुख्य निर्माताओं और वितरकों की पहचान करने के लिए आगे की जांच कर रही है ताकि इस पूरे सिंडिकेट को जड़ से खत्म किया जा सके।

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