बुजुर्ग की बीमारी का फायदा उठाकर ड्राइवर ने की ₹2.57 लाख की ठगी, साइबर पुलिस ने दबोचा

नई दिल्ली: दिल्ली के सेंट्रल जिला की साइबर थाना पुलिस ने एक ऐसे घरेलू कर्मचारी को गिरफ्तार किया है जिसने अपने मालिक के 15 साल के भरोसे को तार-तार कर दिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान देवेंद्र (39 वर्ष), निवासी मंडोली, उत्तर-पूर्वी दिल्ली के रूप में हुई है। आरोपी ने परिवार के एक बुजुर्ग सदस्य, जो अल्जाइमर से जूझ रहे हैं, की स्थिति का फायदा उठाते हुए उनके बैंक खाते से ₹2.57 लाख की राशि अलग-अलग UPI ट्रांजेक्शन के जरिए साफ कर दी। पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल वित्तीय ट्रेल के आधार पर आरोपी को जीटीबी नगर से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।

सेंट्रल जिला के डीसीपी रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि पीड़ित के बेटे नितिन गोयल ने एनसीआरपी पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, 4 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच उनके पिता के खाते से कई संदिग्ध यूपीआई ट्रांजेक्शन हुए थे। शुरुआत में परिवार को लगा कि यह किसी बाहरी साइबर ठग का काम है, लेकिन जब साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक योगराज दलाल के नेतृत्व में एसआई गौरव सिंह और हेड कांस्टेबल भारत सिंह की टीम ने जांच शुरू की, तो शक की सुई घर के पुराने ड्राइवर देवेंद्र की ओर घूमी।

जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी देवेंद्र पिछले 15 सालों से इस परिवार के साथ ड्राइवर और घरेलू सहायक के रूप में काम कर रहा था। उसे अच्छी तरह पता था कि बुजुर्ग मालिक अल्जाइमर से पीड़ित हैं और उन्हें कुछ ही समय पहले हुई बातें याद नहीं रहतीं। इसी का फायदा उठाकर आरोपी ने चोरी-छिपे बुजुर्ग का मोबाइल एक्सेस किया और किस्तों में पैसे अपने करीबियों के खातों में ट्रांसफर कर दिए। वारदात को अंजाम देने के बाद, पकड़े जाने के डर से आरोपी 5 मई को अचानक नौकरी छोड़कर फरार हो गया था।

पुलिस टीम ने तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय खुफिया जानकारी की मदद से 8 मई को आरोपी को धर दबोचा। पूछताछ के दौरान देवेंद्र ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि उसे पूरा विश्वास था कि पीड़ित अपनी बीमारी के कारण इन ट्रांजेक्शन को याद नहीं रख पाएंगे। फिलहाल पुलिस चोरी की गई राशि की रिकवरी के लिए प्रयास कर रही है। दिल्ली पुलिस ने इस घटना के मद्देनजर जनता के लिए परामर्श जारी किया है कि वे अपने घर के बुजुर्गों के बैंक खातों और यूपीआई हिस्ट्री की नियमित निगरानी करें और घरेलू सहायकों का पुलिस वेरिफिकेशन अवश्य कराएं।

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